सरकारी क्रय केंद्र पर किसान दूसरे का गेहूं बिक्री नहीं कर सकेगा। खरीद केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए किसान को अपनी खतौनी साथ में लानी होगी। क्रय केंद्र पर खतौनी में उपलब्ध जमीन तथा जनपद में गेहूं की उत्पादकता के गुणक के समतुल्य ही गेहूं की खरीद हो सकेगी।
जिले में गेहूं की खरीद के लिए 49 क्रय केंद्र बने हुए हैं। शासन से 1735 रुपये क्विंटल का भाव निर्धारित कर रखा है। जिले में 104268 मीट्रिक टन में गेहूं की फसल की बुवाई की गई। फसल कटाई में 39 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता निकल कर आई। कुछ बढ़े किसान मुनाफा कमाने के लिए छोटे किसान से कम दाम पर गांव में ही खरीद करके क्रय केंद्र पर लगा देते हैं। किसान को फसल का पूरा लाभ दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। खरीद में बिचौलिये को रोकने के लिए खरीद के समय खतौनी अनिवार्य की गई है। केंद्र प्रभारी खरीद करते समय खतोनी में किसान पर उपलब्ध जमीन देखेंगे। इसके बाद क्रोप कटिंग में जनपद की उत्पादकता का गुणांक निकालने के बाद ही खरीद करेंगे। यदि किसान इससे अधिक गेहूं क्रय केंद्र पर लेकर पहुंचेगा तो उसकी खरीद नहीं होगी। इतना नहीं नहीं किसान अधिकतम दो बार ही क्रय केंद्र पर गेहूं बेच सकेगा। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी विजय कुमार शुक्ला का कहना है कि केंद्र प्रभारी पूरी तरह से संतुष्ट होने के बाद ही खरीद करें। सरकारी बोरी का कोई व्यापारी या आढ़ती दुरुपयोग न कर सके। किसी वाहन में बिना कोड का गेहूं पाया जाता है तो उसकी जांच की जाए। आढ़ती या बिचौलिए की संलिप्तता पाई जाने पर कार्रवाई की जाए। केंद्र पर किसान के लिए बैठने, पेयजल आदि की पर्याप्त व्यवस्था रखी जाए।