मैनपुरी। परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान के तहत हर वर्ष लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद भी परिषदीय स्कूलों की छात्र संख्या कम होती जा रही है। स्कूलों से पिछले चार वर्ष में 89 हजार छात्र-छात्राएं छोड़ कर चले गए। जबकि चार वर्ष में प्रचार प्रसार के नाम पर एक करोड़ से अधिक धनराशि खर्च की गई।
परिषदीय स्कूलों में प्रतिवर्ष सर्व शिक्षा अभियान के तहत 25.86 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी स्कूलों से छात्र लगातार छोड़कर जा रहे हैं। प्रचार प्रसार का परिणाम शून्य नजर आ रहा है। जनपद में पिछले चार वर्ष के आंकड़ों पर यदि नजर डाली जाए तो पता चलता है कि वर्ष 2014-15 में जनपद में 219574 छात्र-छात्राएं परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में पंजीकृत थे। जो संख्या वर्ष 2017-18 में घटकर 130047 पर आ गई। 89527 छात्र परिषदीय स्कूलों में कम हो गए।
जबकि चार वर्ष में केवल स्कूल चलो अभियान के तहत जनपद में 10344000 रुपये की धनराशि खर्च की गई। यह आंकड़े विभाग की कार्य शैली पर कई सवाल खड़े कर रहे हैं। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्कूल चलो अभियान के तहत धनराशि चार चरणों में खर्च होती है। सबसे पहले स्कूल स्तर पर प्रत्येक विद्यालय पर एक-एक हजार रुपये की धनराशि भेजी जाती है। इसके बाद न्याय पंचायत स्तर पर रैली आदि निकालने के लिए दो-दो हजार रुपये, ब्लाक स्तर पर रैली आदि निकालने के लिए प्रति ब्लाक 20 हजार रुपये की धनराशि खर्च होती है।