फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आलू आधारित उद्योग लगे तो बने बात

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
मैनपुरी। उद्योगों के साथ ही कृषि को बढ़ावा देने पर प्रधानमंत्री का जोर है। यही कारण है कि अगले महीने पेश होने वाले बजट से किसानों को काफी उम्मीदें हैं। जिले की आलू प्रमुख पैदावार है, साथ ही बीते वर्ष किसानों को नुकसान भी हो चुका है। किसानों को आलू के लिए स्थाई नीति के साथ ही आलू आधारित उद्योग की दरकार है। अगर बजट में आलू आधारित उद्योग की जिले को सौगात मिल जाए तो क्षेत्र के किसानों की तकदीर बदल जाएगी।

साल 2017 में आलू की खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हुई। शीतगृह का किराया नहीं निकला तो किसानों ने 20 लाख कुंतल आलू शीतगृहों में ही छोड़ दिया। बाद में शीतगृह मालिकों को यह आलू फिकवाना पड़ा। अब जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्योग और खेती-किसानों को बात कर रहे हैं तो बजट से किसानों की उम्मीद जुड़ना स्वभाविक है। जिले में आलू की खेती को कैसे पंख लगें इस पर किसानों ने कई तरह की दलीलें दीं। कई किसानों ने स्थानीय नीति, कई ने एक्सपोर्ट केंद्र खोलने और कई ने जिले के लिए आलू आधारित उद्योग की मांग तक वित्त मंत्री से कर डाली।
विज्ञापन


जिले के आलू किसान चिप्स फैक्ट्री चाहते हैं। उनका मानना है कि अगर जिले को चिप्स फैक्ट्री की सौगात मिल जाए तो उन्हें आलू के सही दाम मिलेेंगे। साथ ही आलू की खेती को बढ़ावा मिलेगा। अगर आलू की मांग बढ़ती है तो किसानों को दाम भी अच्छा मिलेगा। आलू आधारित उद्योग अगर जिले में लगता है तो आलू की मांग बढ़ना स्वभाविक है।
विज्ञापन


सरकार आलू का न्यूनतम निर्धारित मूल्य तय कर रही है। इससे किसानों को जरूर फायदा होगा। साथ ही जिले में आलू चिप्स के उद्योग लगाए जाएं तो किसानों को सही मूल्य मिल सकेगा। सरकार को अपने शीतगृह खोलने चाहिए, इसमें किसानों को किराए में छूट दी जानी चाहिए। ऐसा करने से किसानों की लागत कम हो जाएगी। साथ ही आलू को बाहर भजने में भी मदद मिलेगी। जिले में चिप्स फैक्ट्री लग जाए तो फायदा मिलेगा। साथ ही सरकार को आलू खरीद केंद्र भी खेलते चाहिए। इससे किसान अपने आलू को सही समय पर सही कीमत पर बेच सके।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें