एटा। पुलिस लाइन में स्थापित हास्पिटल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। संसाधनों का अभाव होने के साथ ही जर्जर हो चुकी बिल्डिंग में चिकित्सक बैठने से कतरा रहे है। चिकित्सकों की अनुपस्थिति और संसाधनों का अभाव होने के चलते पुलिस लाइन अस्पताल लोगों के लिए कारगर साबित नहीं हो पा रहा है।
पुलिस कर्मियों से चौबीस घंटे ड्यूटी लेने के बाद भी उन्हें सुविधाओं के नाम पर ठेंगा दिखाया जा रहा है। कहने को पुलिस लाइन में अस्पताल बना हुआ है। अस्पताल में चिकित्सक और स्टाफ की बात तो दूर इसमें तो मरीजाें के लिए बेड और गद्दे तक नहीं। दवाएं भी केवल खानापूर्ति के लिए ाखी जाती हैं।
जरा सी बीमारी होने पर पुलिस वालों को निजी अस्पतालों में इलाज कराना पड़ता है। अस्पताल में स्वीपर की तक तैनाती नहीं है। अस्पताल पर तैनात फार्मासिस्ट डा राजेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में संसाधन जुटाने के लिए चार-पांच बार अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। इसके बाद भी हालातों में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है।
दूसरी तरफ सूत्रों की माने तो पुलिस लाइन में बने अस्पताल में डॉ. उत्सव जैन की तैनाती है। इनके पास पुलिस लाइन के साथ ही पीएसी और जेल में बंदियों का इलाज कराने की जिम्मेदारी है। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से एक चिकित्सक पुलिस कर्मियों के लिए इलाज के लिए उपलब्ध रहेगा।