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400 साल बाद गुलजार होगा यमुना का किनारा, ये होंगे बदलाव

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आगरा। मुगलिया राजधानी रही ताजनगरी में 400 साल बाद यमुना का किनारा उसी रौनक में नजर आ सकता है, जब यह मुगलिया दरबारियों की 45 हवेलियों से गुलजार था।
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प्रस्तावित यमुना रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट को 32 खंभा से लेकर नगला पैमा तक बनने वाले आगरा बैराज स्थल तक बनाया जाएगा। 75 मीटर तक चौड़े रिवर फ्रं ट के लिए जमीन के सर्वे के बाद चार माह में प्रोजेक्ट तैयार कर प्रदेश सरकार को सौंपा जाएगा।

यमुना रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट का मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए आगामी 25 सालों के लिए इसे बनाया जाएगा। मुगलिया दौर में यमुना किनारे 45 हवेलियां और बगीचे थे, लेकिन अब इनमें से कुछ के ही अवशेष हैं। कई बगीचों पर अवैध कब्जे हैं तो कई में बस्तियां बसी हुई हैं।
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रिवर फ्रंट के लिए सर्वे में यह समस्या नजर आ चुकी है। बांयी ओर 17 में से पांच बगीचे एएसआई द्वारा संरक्षित हैं। बाकी की जमीन पर रिवर फ्रंट सबसे पहले बनाया जाएगा, इसमें ट्रैफिक, सुरक्षा, पार्किंग, लोगों के रोजगार, नालों को यमुना में जाने से रोकने, सीवर टेप करने जैसे कदम शामिल होंगे।


मास्टर प्लान तैयार कर रहे आर्किटेक्ट आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक मुगलिया दौर का केवल नजारा ही न रहे बल्कि यमुना भी उसी रूप में निर्मल, स्वच्छ नजर आए, यह भी उनके प्लान का हिस्सा रहेगा। सीवर और औद्योगिक कचरे को यमुना से दूर करने, सफाई के लिए मास्टर प्लान में योजनाएं होंगी। यह देश में अनूठा रिवर फ्रंट होगा।

दांयी ओर एएसआई बना रही बगीचे

यमुना के दांयी ओर ताज हेरिटेज कारीडोर की जगह पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण चार मुगल गार्डन विकसित कर रहा है। हवेली महाबत खां, हवेली होशदार खान, हवेली आजम खान और हवेली मुगल खान के नाम से एएसआई अधिसूचना जारी कर चुका है।
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20 हेक्टेयर जमीन पर एएसआई मुगलिया दौर की तरह बगीचा बनाएगा। वहीं, हवेली खान ए दौर्रान, हाथी खाना और हवेली आगा खान को भी संरक्षित करने की अधिसूचना जारी हो चुकी है, जिसकी अंतिम अधिसूचना जारी होनी बाकी है। इन सात हवेलियों के एएसआई संरक्षित होने के बाद इस किनारे के हालात में सुधार होगा।
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