एटा। प्रदेश सरकार के गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि क्षत्रिय जाति नहीं वरन एक विचारधारा है। दूसरों की सहायता करने वाले, समाज एवं धर्म विध्वंसकों के खिलाफ आवाज उठाने वाले ही सच्चे क्षत्रिय होते हैं। इतिहास गवाह है कि राणा प्रताप के वंशज क्षत्रिय कुर्बानियों के लिए जाने जाते हैं। हम जाति से ही नहीं वरन मन, कर्म, वचन एवं धर्म के पक्के होते हैं। वह ठंडी सड़क स्थित ग्रीन गार्डन में आयोजित क्षत्रिय सम्मेलन एवं शस्त्रपूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम में क्षत्रिय महासभा के अध्यक्ष एवं सांसद हरिवंश सिंह ने कहा कि समाज को शिक्षा की ओर भी ध्यान देना चाहिए। धन ही सब कुछ नहीं होता। पूर्व मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि परिश्रम का कोई शार्टकट नहीं होता। हमें सफलता के लिए पूरे प्रयास से काम करना होगा। अलीगंज विधायक सत्यपाल सिंह राठौर ने अतिथियों का आभार जताया। संयोजक एवं क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह चौहान, युवा जिलाध्यक्ष सुनील सोलंकी ने अतिथियों को पगड़ी पहनाकर एवं प्रतीक चिह्न भेंटकर स्वागत किया। आयोजन को राघवेंद्र सिंह राजू, जितेंद्र सिंह चौहान आदि ने भी संबोधित किया।
भाजपामयी रहा राणा का भाषण
सुरेश राणा के भाषण के दौरान आयोजन भाजपामयी नजर आया। प्रदेश सरकार के मंत्री सुरेश राणा ने क्षत्रिय समाज से ज्यादा भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, मां सीता, भारत माता, हिंदू समाज एवं राणा, शिवा एवं रामप्रसाद बिस्मिल का जिक्र किया। उन्हाेंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री योगी का भी जिक्र कर उन्हें देश का गौरव बताया। इस अवसर पर प्रदेश सरकार के मंत्री ने लोगों को स्वच्छता की शपथ भी दिलाई।
मेधावियों को किया गया सम्मानित
क्षत्रिय समाज द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मेधावियों का सम्मान भी किया गया। क्षत्रिय महासभा की जिला इकाई द्वारा हाईस्कूल, इंटरमीडिएट एवं अन्य कक्षाओं में अच्छे अंक प्राप्त करने वालों को प्रशस्ति पत्र एवं प्रतीक चिह्न एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
भगवा हुआ शहर, जीटी रोड पर लगा जाम
क्षत्रिय समाज ने जुलूस निकाल कर एकता एवं शक्ति का प्रदर्शन किया। सिर पर केसरिया एवं चुनरी की पगड़ी बांधकर समाज के लोग देखते ही बन रहे थे। इस दौरान बाइक सवारों के हाथों में केसरिया धर्म पताकाओं से पूरा माहौल भगवा हो गया। युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। वीरांगना की टोलियां भी पीछे नहीं थीं। अधिकांश क्षत्रिय महिलाएं भगवा परिधानों में नजर आईं।