एटा। जिला अस्पताल में शनिवार को ट्रांसफार्मर फुंकने से करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही। बिजली न आने से मरीज बिलबिलाते नजर आए। भीषण गर्मी में अस्पताल प्रशासन ने जनरेटर तक भी चलाना मुनासिब नहीं समझा।
शनिवार को दोपहर में जिला अस्पताल में लगा 5केवीए विद्युत ट्रांसफार्मर फुंक गया। इसके चलते पूरे अस्पताल की बिजली बाधित हो गई। अचानक बिजली गुल होने से मरीजों को दिक्कत का सामना करना पड़ा। मरीज वार्डों में गर्मी से परेशान होते रहे।
आलम यह हुआ कि कुछ मरीज वार्डों से निकलकर बाहर खुले में बैठ गए। बर्न वार्ड में मरीजों को सबसे ज्यादा दिक्कत का सामना करना पड़ा। जनरेटर चलाने वाला कर्मचारी भी गायब हो गया। देर शाम ट्रांसफार्मर लगने के बाद बिजली आपूर्ति सुचारु हो सकी।
जनरेटर के लिए आया बजट नहीं हुआ उपयोग
जिला अस्पताल में लगे जनरेटर के डीजल के लिए आने वाला बजट खर्च नहीं हो रहा। ऐसे मे अस्पताल के खाते में 12 लाख रुपये एकत्र हो चुके हैं। जनरेटर की मरम्मत नहीं होने और जनरेट चलाने वाला कर्मचारी गायब रहने से बिजली आपूर्ति बाधित होने पर मरीज तड़पने को मजबूर होते हैं।
चालक ओढ़ रहे एंबुलेंस के कंबल
जिला अस्पताल में संचालित 108, 102 और लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस के कंबल उनके चालक इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में यदि कोई गंभीर मरीज का एंबुलेंस से हायर सेंटर ले जाना हो तो गंदा कंबल ओढ़ाने पर उसे संक्रमण हो सकता है। एंबुलेंस के कंबल मरीजों के नहीं चालकों के कमरे की शोभा कंबल बढ़ा रहे हैं। और और जिस स्थान पर एंबुलेंस चालक रहते हैँ उस कमरे के आसपास जलभराव के अलावा गंदगी पसरी है।
बदहाली की मार झेल रही मरीज
यूं तो जिला अस्पताल का हाल किसी से भी छिपा नहीं है। 70 डाक्टरों में महज 22 डाक्टर ही अस्पताल को सेवाएं दे रहे हैं। वहीं दवाओं की आपूर्ति ठप पड़ी है। एंटी रैबीज वैक्सीन ढाई महीने से नहीं है। अस्पताल प्रशासन दवाओं की आपूर्ति होने की बात कह रहा है, लेकिन जिला अस्पताल में दवा के अभाव में मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं।