मथुरा। केंद्र सरकार ने 2025 तक टीबी को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प लिया है। इस संकल्प को पूरा करने के लिए क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम में भी परिवर्तन किए जा रहे हैं। नए आदेश में टीबी रोगियों की घर जाकर काउंसलिंग करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यालय को निजी क्षेत्र में इलाज करा रहे टीबी रोगियों का शत-प्रतिशत जानकारी को कहा गया है।
इसके अलावा टीबी रोगी के रोग मुक्त होने तक उसकी देखरेख करना, पूर्ण उपचार की व्यवस्था करना, रोगी के संपर्क में आए व्यक्तियों का मूल्यांकन करना, रोगी एचआईवी की जांच कराये जाने की व्यवस्था करना है। जिला पीपीएम कोआर्डिनेटर आलोक तिवारी ने बताया कि सरकार की मंशा पोलियो की तर्ज पर टीबी कार्यक्रम को चलाने की है। इसमें टीमें बनाकर डोर टू डोर जाकर काउंसलिंग कराई जाएगी। दवाएं, जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
शासनादेश के अनुपालन में रोगियों की काउंसलिंग का कार्य शुुरू कर दिया गया है। रोगियों की एचआईवी जांच निशुल्क कराई जा रही है।
-डा. रविंद्र गुप्ता, जिला क्षय रोग नियंत्रण अधिकारी
रोगी बीच में ही छोड़ देते हैं दवा
जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यालय के सीनियर हैल्थ सुपरवाइजर अखिलेश दीक्षित ने बताया कि टीबी के उपचार में सबसे बड़ी बात निरंतर दवा का सेवन है। लेकिन रोगी बीच में ही दवा छोड़ देते हैं। ऐसे में रोगियों की काउंसलिंग जरूरी है।