गोवर्धन (मथुरा)। राधे राधे जपते जपते गिरिराज जी की परिक्रमा हो रही है। चाहें सत्तर साल के नरोत्तम हों या फिर सात साल का प्रहलाद। 75 साल की दुलारी हों या फिर अस्सी साल के रामकिशन। सात कोस की परिक्रमा पूरे जोश और उत्साह के साथ पूरी की। इन सभी के चेहरों पर कहीं थकान नजर नहीं आ रही थी। रामकिशन बोले, राधे राधे जपते ही पूरी थकान दूर हो जाती है। कब परिक्रमा पूरी हो गई कुछ पता ही नहीं चला।
मुड़िया पूर्णिमा मेले के दूसरे दिन करीब 13 लाख कृष्ण भक्त गोवर्धन पहुंचे थे। परिक्रमार्थियों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। बुधवार को तो परिक्रमा मार्ग पर भक्तों का सैलाब नजर आ रहा था। भगवान कृष्ण के भजनों पर थिरकते हुए चल रहे थे भक्त। कभी गिरिराज जी के जयकारे गूंजते तो कभी राधा मैया की जय-जयकार। गिरिराज की भक्ति में डूबे भक्तों ने कब सात कोस की परिक्रमा पूरी कर ली खुद इन्हें भी नहीं पता चला।
दिल्ली से 70 साल के नरोत्तम अपने परिवार के साथ पहुंचे थे। नरोत्तम का कहना था कि सुबह पांच बजे से परिक्रमा शुरू की थी और दोपहर तक पूरी कर ली। उनके चेहरे पर कहीं कोई थकान नहीं थी। जयपुर से पहुंचे प्रहलाद का कहना था कि परिक्रमा तो खुद गिरिराज जी लगवाते हैं। उन्हें घर पर जरा सा चलने में भी थकान होने लगती है लेकिन यहां सात कोस की यात्रा कब पूरी कर ली पता ही नहीं चला।
वह रास्ते रास्ते भर राधा राधा करते हुए चल रहे थे। बीच बीच में लगने वाले गिरिराज जी के जयकारे और जोश भर देते हैं। भरतपुर से पहुंची दुलारी भी हर मुड़िया मेले में परिक्रमा लगाने आती हैं। दुलारी की उम्र भी 75 साल है। वह अपनी बहुओं को लेकर पहुंची थीं। दुलारी का कहना है अगर कोई पूरी भक्ति के साथ गिरिराज जी की परिक्रमा लगाने के लिए आता है तो उसे कोई थकान नहीं होती।
जब थकान लगे तभी पूरे जोश के साथ गिरिराज जी के जयकारे लगाने लगो। जयपुर निवासी सुनील कुमार अमेरिका में रह रहे हैं। वह भी परिक्रमा लगाने के लिए अपनी पत्नी के साथ पहुंचे थे। दिल्ली के गोविंद राणा इंग्लैंड में रहते हैं। लेकिन हर मुड़िया पूर्णिमा मेले पर परिक्रमा लगाने के लिए पहुंचते हैं।
मांग कर तो देखो हर मनोकामना पूरी करते गिरिराज
गोवर्धन। गिरिराज जी के तमाम भक्त ऐसे हैं जो हर सुख दुख की बात करने के लिए पहुंचते हैं। इन्हें विश्वास है कि भगवान उनकी समस्या को दूर कर देते हैं। पलवल से पहुंचे चंद्रभान सिंह का कहना है कि जमीन का विवाद चल रहा था।
उनका पूरा परिवार परेशान हो गया था। वह सभी को लेकर गिरिराज जी की शरण में आए। एक हफ्ते में समस्या का समाधान हो गया था। अलीगढ़ निवासी कुशलेंद्र सिंह का कहना है कि बेटे की नौकरी के लिए बहुत परेशान थे। बेटा भी तनाव में रहने लगा था। गिरिराज जी के सामने समस्या रखी। आज उनका बेटा बैंक में लग गया है। अब वह साल में तीन बार परिक्रमा लगाने के लिए गोवर्धन आते हैं।
कुशलेंद्र का कहना है कि भगवान से भी जो भी मांगा जाता है वह जरूर पूरा होता है। बरेली से विपिन गुप्ता का परिवार परिक्रमा लगाने के लिए आया था। अपने लड्डू गोपाल को लेकर परिक्रमा लगा रहे थे। विपिन ने बताया कि शादी के आठ साल के बाद भी उनके कोई संतान नहीं हुई थी।
भगवान कृष्ण के दरबार पर आना शुरू किया तो उनके बेटा हुआ। आज बेटा पांच साल का हो गया है। वह अब अपने बेटे के साथ परिक्रमा लगाने के लिए पहुंचते हैं। जिक्र केवल इन्हीं लोगों का नहीं है बल्कि भक्तों को गिरिराज जी पर बड़ा भरोसा है। इन लोगों का मानना है कि गिरिराज जी से जो भी मांगा जाता है वह मिलता है।