मैनपुरी। जीएसटी के विरोध में रविवार को शहर के प्रमुख कपड़ा मार्केट और दुकानें बंद रहीं। इस दौरान व्यापारियों ने अन्य दुकानें भी बंद कराईं। इसके बाद बजाजा बाजार में धरना-प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। व्यापारियों ने कपड़ा बाजार सोमवार को भी बंद रखने का निर्णय लिया है। वहीं बंद से 20 लाख का व्यापार प्रभावित हुआ है।
जीएसटी का सबसे ज्यादा विरोध कपड़ा व्यापारी ही कर रहे हैं। इसका कारण यह है कि अब तक कपड़ा व्यापार टैक्स फ्री था। अब इसको टैक्स के दायरे में लाया गया है। इसके चलते कपड़ों का व्यापार करने वाले व्यापारियों में सर्वाधिक आक्रोश है। रविवार को सुबह कपड़ा व्यापारियों ने एकत्रित होकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूरा कपड़ा बाजार बंद करा दिया।
प्रदर्शन कर रहे व्यापारियों ने बजाजा बाजार, लेनगंज, सदर बाजार, करहल रोड, आगरा रोड आदि पर घूम-घूम कर कपड़ों की दुकानों को बंद कराया। इसके बाद बजाजा बाजार में एक स्थान पर बैठकर धरना-प्रदर्शन किया। उन्होंने केंद्र सरकार और जीएसटी के विरोध में नारेबाजी की। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि कपड़ा व्यापार को जीएसटी के दायरे में लाकर सरकार ने नइंसाफी की है। यह व्यापारियों का उत्पीड़न है। सरकार को इस निर्णय को वापस लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कपड़ा व्यापारियों का यह विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहेगा। अजय कुमार जैन, विजय गुप्ता, कुंदन, मोहम्मद एजाज, राजू, नीतेज आदि मौजूद थे।
क्या बोले व्यापारी
कपड़ा व्यापारी आयुष जैन का कहना है कि सरकार को जीएसटी के दायरे से कपड़ा व्यापार को बाहर रखना चाहिए। कपड़ा हर व्यक्ति की जरूरत होती है। ऐसे में गरीब आदमी पर सीधे-सीधे महंगाई की मार पड़ेगी। सरकार को एक बार फिर इस पर विचार करना चाहिए।
मोहम्मद एजाज का कहना है कि कपड़ा व्यापार को जीएसटी के दायरे में लाकर सरकार ने व्यापारियों के उत्पीड़न की शुरुआत कर दी है। इससे एक बार फिर इंस्पेक्टर राज कायम हो जाएगा। इसके चलते व्यापार करना मुश्किल होगा और कपड़ा व्यापारियों की परेशानी कई गुना बढ़ जाएगी।
प्रशांत जैन बोले, जीएसटी के तहत कपड़ा व्यापार को लाना इस व्यापार को तबाह करने की योजना है। सरकार को चाहिए कि एक बार फिर इस बारे में सोचे और जीएसटी से कपड़ा व्यापार को मुक्त रखा जाए। ताकि इस पर महंगाई की मार न पड़े।