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39 दिन में 16 प्रतिशत ही हो सकी गेहूं की खरीद

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गेहूं से पटी हुई मंडी। - फोटो : अमर उजाला
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मैनपुरी। लाख कोशिशों के बाद भी गेहूं खरीद जोर नहीं पकड़ पा रही है। हाल ये है कि लक्ष्य पूर्ति होना इस बार असंभव लग रहा है। अब तक लक्ष्य के सापेक्ष केवल 16 प्रतिशत गेहूं की ही खरीद हो सकी है। हालांकि प्रशासन ने गेहूं क्रय के लिए दस नए केंद्र बढ़ा दिए हैं। एक अप्रैल से जिले में गेहूं खरीद की शुरूआत हुई थी। इसके लिए जिले में कुल 72 क्रय केंद्र बनाए गए थे। इन पर कुल छह लाख 65 हजार क्विंटल गेहूं की खरीद की जानी थी।
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अब तक इन केंद्रों पर कुल एक लाख पांच हजार 188 क्विंटल गेहूं की ही खरीद हो सकी है। जो लक्ष्य के सापेक्ष मात्र 16 प्रतिशत है। बताते चलें कि अब तक 39 दिनों में इतनी खरीद हो सकी है। क्रय केंद्रों पर 15 जून तक खरीद की की जानी है। ऐसे में अब 36 दिन ही शेष बचे हैं और 84 प्रतिशत गेहूं की खरीद बाकी है। इतने कम समय में आखिर लक्ष्य कैसे पूर्ण होगा।

लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए विभाग ने दस नए क्रय केंद्र भी बढ़ा दिए हैं। इसके बाद जिले में अब कुल गेहूं क्रय केंद्रों की संख्या 72 से बढ़कर 82 हो गई है। इसमें कोआपरेटिव के तीन, उपभोक्ता सहकारी संघ के दो व पांच अन्य केंद्र बढ़ गए हैं। इन पर गेहूं की खरीद शुरू हो गई है।
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चार दिन ठप रही थी खरीद
अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में चार दिन के लिए गेहूं की खरीद ठप रही थी। इसके पीछे अवैध वसूली एक कारण था। सहकारी समितियों से गोदाम जाने वाले गेहूं पर वहां के कर्मचारियों द्वारा प्रति बोरा दस रुपये वसूल किया जा रहा था। इसके विरोध में सहकारी समितियों के सचिवों ने हड़ताल कर दी थी। बाद में उच्चाधिकारियों द्वारा मामला शांत करा दिया गया।

कई केंद्रों पर नहीं भंडारण के इंतजाम
जिले में एक दर्जन गेहूं क्रय केंद्र ऐसे हैं, जहां भंडारण के कोई इंतजाम नहीं है। क्रय किया गया गेहूं खुले में ही रखा है। अगर मौसम खराब होता है तो गेहूं भीग जाएगा, जिससे सरकार को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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