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नगर पालिका का चहेता बाबू बना सिरदर्द

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मैनपुरी। नगर पालिका कार्यालय में तैनात वरिष्ठ लिपिक सेवानिवृत्ति के एक महीने बाद भी कार्यभार नहीं छोड़ रहा है। लिपिक नगर पालिका चेयरमैन और अधिकारियों का इतना प्रिय है कि वे फिर से उसे संविदा पर नौकरी देना चाहते हैं, लेकिन बोर्ड की बैठक में हुए हंगामे ने उनकी मंशा पर पानी फेर दिया है।
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नगर पालिका में कार्यरत लिपिक 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, लेकिन एक महीने बाद भी उनके द्वारा जो जिम्मेदारियां निभाई जा रही थीं उनका कार्यभार दूसरे को नहीं सौंपा गया है। लिपिक की पहुंच इतनी है कि अब वह सत्ताधारी कुछ नेताओं और पालिकाध्यक्ष से सांठगांठ कर सेवानिवृत्त होने के बाद भी नौकरी करना चाहते हैं। इसके लिए वे संविदा पर तैनाती की मांग कर रहे हैं।

दो दिन पूर्व नगर पालिका बोर्ड की बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में सेवानिवृत्त लिपिक की संविदा पर तैनाती का प्रस्ताव रखा गया। जिसे लेकर कुछ सभासदों ने हंगामा शुरू कर दिया। सभासदों ने कहा कि किसी भी संविदा कर्मचारी पर वित्तीय कार्य से संबंधित जिम्मेदारी नहीं हो सकती। सभासदों के हंगामे के बाद उनकी संविदा पर तैनाती तो लटक गई, लेकिन लिपिक ने अभी तक अपने द्वारा सेवा के दौरान देखा जा रहा कार्यभार किसी दूसरे को नहीं सौंपा है।
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जनपद से बाहर चले गए हैं वरिष्ठ लिपिक
सेवानिवृत्ति के बाद वरिष्ठ लिपिक संविदा पर तैनाती की मांग कर रहे थे, लेकिन संविदा पर तैनाती की बात नहीं बनी तो वे जनपद से बाहर चले गए। अभी तक उन्होंने कार्यभार नहीं सौंपा है जो नगर पालिका के कर्मचारियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। लिपिक पर सूचना का अधिकार, कर्मचारियों की फाइल देखरेख तथा पेंशन प्रकरण जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां थीं।
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