वृंदावन (मथुरा)। सनातन धर्म में वैष्णव भक्तों के लिए तुलसी कंठी (माला) धारण करना अनिवार्य माना है। यही कारण है कि कंठी और माला की भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लगातार मांग बढ़ रही है। यह मांग गुरु पूर्णिमा पर्व पर कई गुना तक हो जाती है। मांग को देखते हुए वृंदावन के बाजार भी तैयार हैं।
गुरुपूर्णिमा पर्व को लेकर तीर्थ नगरी वृंदावन के मंदिरों, मठों और आश्रमों के साथ बाजार भी तैयार है। गुरुपूर्णिमा पर शिष्यों को धारण कराई जाने वाली तुलसी के दानों से बनी कंठी और मालाओं का दिन रात एक कर निर्माण किया जा रहा है। वृंदावन शहरी क्षेत्र ही नहीं आस पास के ग्रामीण अंचल में इन दिनों बड़े पैमाने पर तुलसी की कंठी, माला, कठुला का निर्माण हो रहा है।
विदेशों में भी कंठी माला की मांग
विदेशों में बसे वैष्णवों में भी तुलसी की कंठी-माला की भारी मांग है। अमेरिका, इंग्लैंड, कनाडा, साउथ अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, रूस, फ्रांस आदि देशों में तुलसी की कंठी माला भेज दी गईं हैं।
कारोबारी दंपती किशोर दीक्षित और लक्ष्मीनारायण शर्मा के अनुसार हर साल लाखों रुपये की तुलसी की कंठियां विदेशों में एक्सपोर्ट की जाती है। उन्होंने बताया मांग पर चांदी एवं सोने के मोती के साथ भी तुलसी की कंठी तैयार की जाती है। कंठी माला की कीमत पांच रुपये से शुरू होकर हजारों तक पहुंच जाती है।