एटा। प्रदेश शासन के निर्देश पर रविवार को आयोजित स्कूल बस चेकिंग अभियान में पहुंचे वाहनों में से 32 को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। वहीं नौ वाहनों में कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
स्कूल वाहन दुर्घटनाएं रोकने के लिए पहली बार प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल वाहन चेकिंग के लिए विशेष शिविर का आयोजन किया गया। प्रदेश परिवहन राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार स्वतंत्र देव सिंह के आदेश पर रविवार को एआरटीओ कार्यालय पर आयोजित शिविर में जिले में पंजीकृत 130 स्कूली बसों में से मात्र 41 बसें ही जांच के लिए पहुंचीं। जांच टीम ने विभागीय मानक पूरे होने पर 32 वाहनों को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी कर दिया। वहीं नौ वाहनों को कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए।
एआरटीओ लक्ष्मण सिंह ने बताया कि कुछ बसों में अग्रिशमन यंत्र एवं सहायता एजेंसियों के फोन नंबर न लिखे होने के चलते पास नहीं किया गया है। उन्हें सोमवार को मौका दिया गया है।
क्या हैं मानक?
स्कूल बसों के लिए पीला रंग, अंदर खुलने वाला गेट, सरियों से बंद खिड़कियां ताकि बच्चे सिर व अंग बाहर न निकाल सकें। अग्रिशमन यंत्र, आपात गेट, वाहन के आगे स्कूल वाहन एवं पीछे विभिन्न अधिकारियों एवं सहायता एजेंसियों के मोबाइल नंबर लिखे होने के निर्देश हैं।
तिहाई वाहन ही पहुंचे जांच को
सड़कों पर दौडने वाले सैकड़ों स्कूली वाहनों में से मात्र 41 के ही पहुंचने पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों की मानें तो इससे अधिक बसें तो जिला मुख्यालय के स्कूलों के लिए ही सड़कों पर दौड़ती हैं। जबकि जिले में तहसील एवं अन्य कस्बा स्तर पर संचालित संस्थाओं से भी दर्जनों बसें संबद्ध हैं। एआरटीओ के अनुसार जिले में 130 स्कूली बसें पंजीकृत हैं।