योगी सरकार ने तमाम तीर्थस्थानों के विकास के लिए अयोध्या, इलाहाबाद, बरसाना, नैमिशरण्य आदि तमाम तीर्थ स्थलों के लिए हजारों करोड़ रुपयों से विकास की योजनाएं बनाई हैं लेकिन तीर्थ सोरों सेकर क्षेत्र की उपेक्षा कर दी। पौराणिक स्थल को पर्यटक स्थल व तीर्थस्थल घोषित करने की मांग करते चले आ रहे हैं। राजनाथ सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में ढोलना की चुनावी जनसभा में सूकर क्षेत्र को तीर्थस्थान का दर्जा देने की घोषणा की थी, किंतु उसके बाद से अब 20 साल बाद जब भाजपा की सरकार बनी तब लोगों की उम्मीदें बढ़ गईं। लेकिन इस बार भी तीर्थनगरी के बाशिंदो को निराशा ही हाथ लगी। बजट में तीर्थनगरी के विकास की कोई योजना सरकार ने प्रस्तुत नहीं की।
वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित पं. भारत किशोर दुबे का कहना है कि सूकरक्षेत्र सबसे प्राचीन तीर्थनगरी है। भगवान विष्णु ने वराह रूप में अवतरित हुए। यहां जन्मे संत तुलसीदास ने रामचरित मानस की रचना की। ऐसे तीर्थ की उपेक्षा योगी जैसे धर्मपरायण मुख्यमंत्री द्वारा समझ से परेह है।
नगर पालिका अध्यक्ष मुन्नी देवी का कहना है कि पौराणिक ऐतिहासिक तीर्थस्थल सूकरक्षेत्र के विकास के लिए इसे पर्यटक स्थल व तीर्थस्थल घोषित किया जाना अति आवश्यक है। नगरपालिका बोर्ड दस जनवरी को बैठक में सर्वसम्मति से इसे तीर्थस्थल घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज चुका है।
वरिष्ठ प्रवक्ता डा. राधाकृष्ण दीक्षित का कहना है कि अन्य तीर्थों की तुलना में सूकरक्षेत्र काफी प्राचीन तीर्थ है। भाजपा के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार का रूख इसके विकास को लेकर निराशाजनक है। जो उचित नहीं है।
गंगा सभा के अध्यक्ष कैलाश चंद्र कटारे का कहना है कि केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार सत्तासीन है। सांसद, विधायक, चेयरमैन भी भाजपा के हैं, फिर भी जनता की मांग पर्यटक व तीर्थस्थल घोषित करने की उपेक्षा करना निराशा करने वाला है।
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