फिरोजाबाद। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव डा. अनिल जैन ने पालीवाल हॉल में नवनिर्वाचित महापौर नूतन राठौर और पार्षदों का माला पहना कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की गुजरात और हिमाचल का चुनाव प्रचंड बहुमत से जीता है। भाजपा को दूसरे दलों के साथ अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां हराने में लगी थीं।
राष्ट्रीय महासचिव डा. अनिल जैन ने कहा कि मैं अपनी जन्मभूमि को प्रणाम करता हूं। फिरोजाबाद के ऐतिहासिक चुनाव में उप्र की सबसे कम उम्र की मेयर नूतन राठौर ने चुनाव जीतकर इतिहास रचा है। उन्होंने मोदी के नारे सबका साथ सबका विकास पर कार्य करने का संकल्प लिया है। वह शहर के विकास में कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने गुजरात और हिमाचल में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई है। मुझे गुजरात चुनाव संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। गुजरात के चुनाव पर पूरे नहीं बल्कि पूरी दुनियां की नजरें टिकी हुई थीं। पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात में विकास का ऐसा मॉडल पेश किया है, जिसकी विदेशों तक चर्चा है।
राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि भाजपा ने गुजरात और हिमाचल में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई है लेकिन कांग्रेस हार को भी जीत बता रही है। दूसरे दलों के साथ अंतर्राष्ट्रीय शक्तियां भाजपा को हराने में लगी हुई थी, जिससे पूरे विश्व में यह संदेश जाए कि मोदी कमजोर हो रहे हैं। गुजरात की जनता ने पूर्ण बहुमत की सरकार देकर सभी साजिशों को ध्वस्त कर दिया।
मेयर नूतन राठौर ने कहा कि भाजपा ने मुझे मुझ पर जो भरोसा दिखाया, मैं विश्वास दिलाती हूं। मेरे लिए एक-एक वोट ऋण के समान है, मुझे शहर का विकास कर उसे चुकाना है। बिना भेदभाव पूरे शहर का विकास करना है। शहर में गंदगी बड़ी चुनौती है, इसे साफ करना है।
गुजरात की तरह हमें जागरूक होना पड़ेगा। जब तक नागरिक अपने कर्तव्य को नहीं समझेंगे, तब तक शहर का विकास नहीं हो पाएगा। जिलाध्यक्ष बीएल वर्मा, मंगल सिंह राठौर, नानकचंद्र अग्रवाल ने भी सभा को संबोधित किया। महानगर अध्यक्ष कन्हैयालाल गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित किया संचालन संजय मिश्र ने किया।
स्वागत के लिए मंच पर न बुलाए जाने से भाजपा के चारों मंडल अध्यक्षों ने कार्यक्रम के दौरान ही विरोध शुरू कर दिया। संचालन कर रहे संजय मिश्र के स्वागत के लिए बुलाने के बावजूद उन्होंने राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्वागत नहीं किया। हॉल से बाहर निकलकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। निर्दलीय जीत कर आए पार्षद भी कार्यक्रम में बुलाए गए थे। इन्हें भी स्वागत के लिए नहीं बुलाया। इन पार्षदों ने भी विरोध जताया कि जब सम्मान नहीं तो बुलाया ही क्यों। बाद में इनका सम्मान करने को बुलाया तो पार्षद नहीं पहुंचे।