फिरोजाबाद। समाजवादी पार्र्टी से लंबे समय से नाराज चल रहे पूर्व विधायक और सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अजीम भाई ने लुकाछिपी का खेल खत्म करते हुए शनिवार को समाजवादी पार्टी से मुंह मोड लिया। सपा नेताओं के खिलाफ गुस्से और दर्द का इजगार उन्होंने खुली जनसभा में किया। निकाय चुनाव में ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम की प्रत्याशी मशरूर फातिमा के समनर्थन का एलान किया।
उन्होंने कहा यह फैसला लेकर वह लंबे समय से मुस्लिम समाज के बीच चल रही खाई को पाटने की कोशिश कर रहे हैं। इस दौरान मंच पर मशरूर फातिमा के पति नौशाद अली सिद्दकी भी पहुंचे।
निकाय चुनाव के शोर के बीच शनिवार की रात को सुहाग नगरी में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम हुआ। वर्ष 2002 में समाजवादी पार्टी से विधायक रहे और दो बार जिलाध्यक्ष रहे अजीम भाई ने नालबंद चौराहे पर खुली जनसभा बुलाई। मंच पर किसी दल का झंडा बैनर नहीं था। जनसभा में अजीम भाई ने सपा में अपने अब तक के सफर की बात विस्तार से भीड़ के सामने रखी।
बसपा सरकार के दौरान पार्टी के आंदोलनों के खातिर लगे मुकदमों पर उन्हें जेल भेजने और सपा की सरकार रहते हुए परिवार की महिलाओं और बच्चों और बुर्जग मां पर किए गए जुल्म का आरोप अजीम भाई ने लगाया। भावुक होते हुए उन्होंने कहा कि यह सब तब हुआ जब वह सपा के जिलाध्यक्ष पद पर थे और पूरी पार्टी अक्षय यादव के सांसद बनने का जश्न मना रही थी। उन्होंने सपा को ऐसा सींचा जैसे कोई मां अपने बच्चे की परवरिश करती है।
इसके बदले में सपा ने उन्हें जेल दी और परिवार के बुर्जुगों को अपमान। वह फिर भी सब कुछ सहते रहे और पार्टी में बने रहे। चुनाव भी लड़ा। पार्टी ने सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी दी उसे भी पूरा करके दिया। इसके बाद भी उनकी पार्टी में लगातार उपेक्षा की जाती रही।
जिलाध्यक्ष ने उन्हें निकाय चुनाव की चुनाव संचालन और चयन समिति में उन्हें नहीं रखा, जबकि सांसद अक्षय यादव ने उन्हें बताया था कि उन्हें चयन समिति में रखा गया है। जिलाध्यक्ष रामसेवक यादव उनसे कहते रहे कि सब कुछ वह हाईकमान के कहने पर कर रहे हैं।
पार्षद प्रत्याशियों के लिए उनसे सूची मांगी गई, उन्होंने जो नाम दिए एक भी प्रत्याशी नहीं बनाया। मेरे सगे बहनोई गुलाम साबिर और सहयोगी आरिफ को टिकट दिया तो मेरे उपर आरोप लगने लगा कि मैने अपने खास लोगों को टिकट दिला दिया। इन दोनों लोगों ने सपा की टिकट ठुकरा कर मेरी इज्जत रख ली।
भीड के बीच अजीम ने कई सवाल उछाले और कहा कि लंबे समय से हमारे बीच एक खाई बनी हुई है। इसका फायदा दूसरे लोग उठा रहे हैं। अब वक्त आ गया है एक होने का। उन्होंने इसके साथ ऐलान किया कि वह किसी दल में नहीं जा रहे न ही किसी पार्टी का समर्थन कर रहे हैं। लेकिन इस निकाय चुनाव में नौशाद अली सिद्दकी की पत्नी मशरूर फातिमा का समर्थन करते हैं।