आगरा। भारतीय शिक्षण मंडल की गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि वर्तमान शिक्षा प्रणाली समर्थ तो बना रही है लेकिन इसमें अनिवार्य तत्व में चूक भी हो रही है। समय परिवर्तन के साथ ही युवाओं में नैतिकता का पतन होता जा रहा है।
इस संबंध में उन्होंने हाल की तीन घटनाओं का जिक्र किया। इसमें परिवार के एक विवाद में एक अरबपति बेटे ने अपने पिता को घर से निकाल दिया। दूसरा मुंबई में आशा साहनी की मृत्यु और तीसरा युवा आईएएस (बक्सर, बिहार के डीएम) द्वारा पारिवारिक कलह के चलते आत्महत्या जैसा कदम उठाना। रविवार को आगरा कॉलेज के गंगाधर शास्त्री सभागार में ‘विश्व कल्याण के लिए भारतीय शिक्षा’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में उन्होंने शिक्षकों को नैतिकतापरक शिक्षा के महत्व का पाठ पढ़ाया।
उन्होंने कहा कि आवश्यक शिक्षा के साथ-साथ विद्यार्थियों में मूल्यों का संचार भी जरूरी है। इसके बिना, विषय में शत-प्रतिशत अंक लाने के बाद भी उसके मन में गहराई बढ़ेगी, इसकी गारंटी नहीं है। डॉ. गोपाल ने कहा कि सफलता के साथ विद्यार्थी के जीवन को सार्थकता बना दे, वही गुरु है। भारत का गुरु भिन्न है। हमारे देश के गुरु विद्यार्थियों के अंदर ईश्वरी बोध कराता है, जबकि पाश्चात्य सभ्यता में यह नहीं है। भारतीय शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय संगठन मंत्री डा. मुकुल कनितकर ने कहा कि आईआईटी से शिक्षा प्राप्त करने वाला छात्र उसी संस्थान में अध्यापन करना पसंद नहीं करता।
वह बड़े पैकेज पर मल्टीनेशनल कंपनियों को अपनी सेवाएं देना पसंद करता है। कहा कि अब भारत का जगत गुरु बनने का मार्ग प्रशस्त हो चुका है। जब भी युग परिवर्तन होता है तब और अधिक बलिदान मांगता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता अवध विश्वविद्यालय के कुलपति मनोज दीक्षित ने की। आभार डा. मनोज रावत ने व्यक्त किया। शिक्षण मंडल के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अंगद सिंह, आरएसएस के क्षेत्र संचालक प्रो. दर्शन लाल, कर्नल विजय तोमर, स्क्वाड्रन लीडर एके सिंह आदि मंचासीन थे। संचालन प्रांत मंत्री अमित रावत ने किया।
इस मौके पर अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डा. रामशंकर कठेरिया, कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल, सांसद बाबूलाल, विधायकगण योगेंद्र उपाध्याय, राम प्रताप सिंह चौहान, जगन प्रसाद गर्ग, पक्षालिका सिंह, डा. जीएस धर्मेश, चौधरी उदयभान सिंह आदि मुख्य रूप से मौजूद थे। डा. यादवेंद्र शर्मा, डा. अनुज पाराशर, जयगोविंद लवानिया, मधुसूदन शर्मा, संतोष कटारा मौजूद रहे।
पुराने दिन याद किए
सह सरकार्यवाह ने अपने पुराने दिन याद करते हुए कहा कि वह भी आगरा कॉलेज के ही विद्यार्थी रहे हैं। एमएससी करते हुए वह आपातकाल के दौरान जेल भी गए। यहां के शिक्षकों से जुड़ी बहुत सी स्मृतियां आज भी मानस पटल पर अंकित हैं।