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कीठम : कहां है तेंदुआ, किसी ने नहीं देखा

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आगरा। कीठम में कभी आठ महीने से तो कभी दो साल से कुनबे के साथ आए तेंदुए की चर्चा ने लोगों में दहशत फैला दी है, हालांकि तेंदुआ कहां है और किसने देखा? यह किसी को नहीं मालूम। कीठम में न तो अकेला तेंदुआ नजर आया और न ही इसका कुनबा। वन्यजीव विभाग सहित कीठम में बने भालू संरक्षण केंद्र, सूर स्मारक विद्यालय और मथुरा रिफाइनरी के कर्मचारियों को भी तेंदुआ इतने महीनों में कभी नजर नहीं आया। वन्य जीव विभाग ने तेंदुए की चर्चाओं पर कहा है कि अगर किसी को यह नजर आए तो पहले विभाग को जानकारी दी जाए। अफवाहें न फैलाएं।
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कीठम में तेंदुए के कुनबे समेत रहने की खबरों से फैली दहशत पर वन्य जीव विशेषज्ञों ने कहा है कि लोग न डरें। कीठम में तेंदुए के कुनबे के साक्ष्य नहीं मिले हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक तेंदुआ रणथंभौर के जंगल से भरतपुर होते हुए कीठम के पास अगर आया भी होगा तो आगे निकल गया होगा। कीठम तेंदुए के लिए आवास लायक ही नहीं है। मादा तेंदुआ अपने बच्चे के साथ इतना लंबा सफर कर ही नहीं सकती। वह बच्चे को बेहद सुरक्षित जोन बनाकर पालती है, जब तक बच्चे शिकार लायक नहीं हो जाते। नर तेंदुआ परिवार के साथ नहीं चलता, बल्कि अकेला ही निकलता है। तेंदुआ अपने पीछे मल-मूत्र की विशेष गंध छोड़ता हुआ निकलता है, जिससे इसकी पहचान होती है। कीठम के जंगल में न तो तेंदुए के मल-मूत्र और गंध मिली और न ही पंजों के निशान।
दो साल से तेंदुए ने क्या खाया, क्या पिया
वन्य जीव विशेषज्ञों के मुताबिक, तेंदुए के प्राकृतिक आवास की जरूरत कीठम का जंगल पूरी ही नहीं करता। अगर तेंदुआ कीठम के जंगल में दो साल से या आठ महीनों से रह रहा है तो इस दौरान तेंदुए का भोजन बने जानवरों की हड्डियां नजर नहीं आईं। कीठम झील पर इस दौरान पानी पीते हुए या शिकार करते हुए भी तेंदुआ किसी को भी नजर नहीं आया। सैकड़ों पर्यटक आते हैं, भालू संरक्षण केंद्र, सूर स्मारक विद्यालय, वन विभाग के कर्मचारी और मथुरा रिफाइनरी के साथ जल शोधन संयंत्र और रक्षा मंत्रालय के कर्मचारियों को तेंदुए का कुनबा नजर नहीं आया। मानव-वन्य जीव संघर्ष को देखते हुए वन्य जीव विभाग ने लोगों से अपील की है कि डरें नहीं और अफवाहें कतई न फैलाएं। अगर किसी ने तेंदुए को कुनबा देखा है तो वह साक्ष्य के साथ वन्य जीव विभाग को जानकारी दे सकता है।
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