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1000 करोड़ से स्मार्ट सिटी बनेगी ताजनगरी

Thu, 30 Jul 2015 02:19 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला
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भारत सरकार की ‘स्मार्ट सिटी’ योजना में शामिल किए जाने का ताजमहल के शहर आगरा का दावा भी स्वीकार कर लिया गया है। मंगलवार को राजधानी लखनऊ में शासन के समक्ष हुए प्रजेंटेशन के बाद बुधवार को मुख्य सचिव आलोक रंजन की अध्यक्षता में हुई बैठक में आगरा को भी हरी झंडी दी गई है। अब शासन आगरा समेत प्रदेश के चयनित 13 शहरों का दावा भारत सरकार के समक्ष प्रस्तुत करेगा। योजना को तहत इन शहरों के विकास के लिए भारत सरकार की ओर से भारी-भरकम रकम उपलब्ध कराई जाएगी।
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नगर आयुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि लखनऊ में कई घंटे तक चली बैठक के दौरान आगरा शहर की रेटिंग 82.5 आंकी गई। इसके आधार पर आगरा का चयन आसानी से हो गया। उन्होंने बताया कि अब स्मार्ट सिटी बनाने के लिए आगरा का नाम भारत सरकार को भेजा जाएगा। भारत सरकार ने कंसलटेंट का पैनल पहले से ही तैयार लिया है। इन्हीं में से कोई एक कंसलटेंट शहर के विकास का खाका खींचेगा। कंसलेटेंसी के लिए भारत सरकार ने दो करोड़ रुपये पहले ही निर्धारित कर दिए हैं। कंसलटेंट के चयन में केवल फायनेंसिल विड ही खोली जाएगी। कंसलटेंट की रिपोर्ट के आधार पर जो प्रोजेक्ट तैयार होंगे उनके लिए भारत सरकार की ओर से करीब 500 करोड़ रुपये मिलेंगे और राज्य सरकार को अंशदान के रूप में 500 करोड़ रुपये व्यय करने होंगे।

एरिया बेस्ड होंगे विकास कार्य
स्मार्ट सिटी योजना और जवाहर लाल नेहरू अरबन रिन्यूअल मिशन (जेनर्म) में मूल अंतर यह है कि जेनर्म प्रोजेक्ट आधारित योजना थी। इसके तहत पेयजल, सीवर, ड्रेन और सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट बनाए गए थे लेकिन स्मार्ट सिटी एरिया आधारित योजना होगी। इसके तहत कुछ क्षेत्र चयनित किए जाएंगे। इनमें तीन श्रेणियों में विकास कार्य कराया जाएगा। पहली श्रेणी में जो वर्तमान मौजूद संसाधन हैं उनमें सुधार होगा। फिर चाहे वे ऐतिहासिक इमारत हों, सड़कें, पार्क, बिजली, सीवर, पेयजल, ड्रेेन, हास्पिटल या स्कूल, उनका विकास किया जाएगा। दूसरी श्रेणी में चयनित क्षेत्र में स्मार्ट सिटी के अनुरूप नए सिरे से विकास कार्य कराए जाएंगे। योजना का तीसरा मुख्य फीचर है ग्रीन फील्ड डेवलपमेंट इसके तहत भी तीन श्रेणी बनाई गई हैं। इसमें पहले श्रेणी में 50 एकड़, दूसरी 250 एकड़ और तीसरी 500 एकड़ क्षेत्र में ग्रीन फील्ड डेवलप किए जाएंगे।
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रेटिंग का आधार  
योजना के अंतर्गत जनगणना 2011 के आधार पर निर्मित शौचालय, ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली, मासिक ई-पत्रिका, इलेक्ट्रानिक्स रूप से सक्षम परियोजनावार म्युनिसिपल बजट व्यय सूचना, सेवा आपूर्ति में विलंब के लिए दंड लगाना, तीन वित्तीय वर्षों के दौरान आंतरिक रूप से राजस्व वसूली, वेतन भुगतान, लेखाओं की लेखा परीक्षा, शुल्क और प्रयोक्ता प्रभारों, किराया और अन्य आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत, कर राजस्व, जलापूर्ति की स्थापना और अनुश्रवण लागत का प्रतिशत, वित्तीय वर्ष 2014-15 के दौरान प्रमुख कार्यों के लिए उपयोग किए गए आंतरिक राजस्व स्रोतों के अंशदान का प्रतिशत, शहर स्तरीय जेएनएनआरयूएम सुधार व मार्च 2012 तक स्वीकृत परियोजनाओं की पूर्णता के आधार पर 5 से 10 अंक देते हुए रेटिंग तय की गई।

रेटिंग में कौन, कहां
मुरादाबाद व अलीगढ़ 90-90 अंक, सहारनपुर 87.50, बरेली 86.11, झांसी 85, कानपुर, इलाहाबाद, लखनऊ, वाराणसी, गाजियाबाद व आगरा 82.50 अंक, रामपुर 78.13, मेरठ व रायबरेली 75-75 अंक, गोरखपुर, आजमगढ़, मथुरा व लखीमपुर 72.50-72.50 अंक, बस्ती व फतेहपुर 67.50 अंक, नवाबगंज 65 अंक, उरई 62.50, फीरोजाबाद व बिजनौर को 60-60 अंक मिले हैं। इसमें टॉप रेटिंग वाले 13 शहरों के नाम स्मार्ट सिटी के रूप में मंजूर करने के लिए भारत सरकार को भेजने का फैसला हुआ।


स्मार्ट सिटी योजना में आगरा का चयन हो गया है। शहर का विकास होगा। मैं शहर की जनता को बधाई देता हूं लेकिन अब चुनौतियां और बढ़ गई हैं। टैक्स की अदायगी की स्थिति ठीक नहीं है। बरेली जैसे छोटे शहर में जलकल के टैक्स की स्थिति यह है सारे व्यय के बाद प्रतिवर्ष एक करोड़ रुपये की बचत होती है यहां कर्मचारियों का वेतन देने तक के पैसे नहीं हैं। शहरवासियों को इसमें मदद जरूर करनी होगी।
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इंद्र विक्रम सिंह, नगर आयुक्त, आगरा
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