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मौत के बाद का सत्य: जिनसे जीवनभर किया प्यार, वो क्यों ने हुए अपने; ये 261 अस्थि कलश हैं इस बात का सुबूत

Thu, 15 Oct 2026 09:21 AM IST
Dhirendra Singh अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

आगरा के मोक्षधाम में अप्रैल से 1 अक्तूबर के बीच अंतिम संस्कार किए गए शवों में से 261 की अस्थियां सुरक्षित रखी हैं। इनमें 100 अस्थियों के मृतकों की पहचान हो चुकी है, लेकिन बार-बार संपर्क करने के बावजूद परिजन उन्हें लेने नहीं पहुंचे। श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी के अनुसार, अस्थियों को तीन साल तक सुरक्षित रखा जाता है। इसके बाद परिजनों के नहीं आने पर समिति अपने खर्च से सोरों गंगा घाट पर विधि-विधान से विसर्जन करती है।
 
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अस्थि कलश - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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 हादसा और फिर अपनों की बेरुखी। मोक्षधाम में रखीं 100 अस्थियां विसर्जन का इंतजार कर रही हैं। अज्ञात होने के कारण इन्हें अपनों का कांधा नसीब हुआ और न कफन। पुलिस ने लावारिस में दाह संस्कार करा दिया। परिजन की तलाश भी पूरी हुई। अस्थियां लेकर जाने को कहा तो समय का अभाव बताकर श्राद्ध पक्ष में आने को कहा। श्राद्ध पक्ष बीतने के बाद अब अस्थियों को विसर्जन करने की जिम्मेदारी भी गैर ही उठाएंगे।
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श्रीक्षेत्र बजाजा कमेटी की ओर से संचालित मोक्षधाम में पुलिस ने अप्रैल से एक अक्तूबर तक विद्युत शवदाह गृह में 971 शव के दाह हुए। इसमें से अभी 261 की अस्थियां सुरक्षित रखी हैं। इनमें से 100 वारिस और 161 लावारिस हैं। पुलिस की छानबीन में इनमें से 100 मृतकों के परिजन की पहचान भी हो गई है। इनको समिति की ओर से कई बार फोन कर अस्थियां लेकर जाने को कहा। कई ने तो फोन ही बंद कर लिए।

किसी ने पितृ पक्ष में आने की बात कही। कुछ ने गरीबी और समय का अभाव बताते हुए संस्था से ही संस्कार करने के लिए कह दिया। इसमें शहर के अलावा आसपास के जिलों के भी हैं। पितृ पक्ष भी बीत गया, लेकिन कोई भी अस्थियां लेने नहीं आया है। मृतकों में कई ऐसे भी रहे, जिन्होंने जीते जी बेरुखी झेली और मरने के बाद अस्थियों को भी अपनों के हाथों से संस्कार के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। किसी के नहीं आने पर तीन साल पूरे होने के बाद संस्था ही इन अस्थियों का सोरों में विसर्जन करेगी।


 

बार-बार फोन किया, देते रहे टालमटोल जवाब
क्षेत्र बजाजा कमेटी के अध्यक्ष अनिल जिंदल ने बताया कि शव दाह के बाद मृतक की शनाख्त हो गई। पुलिस से प्राप्त नंबरों पर संपर्क करने पर श्राद्ध पक्ष तो किसी ने जल्द अस्थियां लेने आने की बात कही। ऐसे भी परिजन रहे, जिन्होंने कहा कि समय की कमी है, संस्था ही अंतिम संस्कार कर दे। इनमें कई अच्छे परिवार से भी रहे।
 

तीन साल तक इंतजार, फिर करते संस्कार
श्रीक्षेत्र बजाजा कमेटी के महामंत्री  राजकुमार जैन ने बताया कि मोक्षधाम में अस्थियों को तीन साल तक सुरक्षित रखा जाता है। इस दौरान कोई नहीं आने पर श्री क्षेत्र बजाजा कमेटी ही अपने खर्चे पर अस्थियों को लेकर सोरों गंगा घाट में विसर्जन किया जाता है। इसमें विधिविधान और धार्मिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है।

 
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शवों क बेकदरी पर शुरू किया प्रकल्प
श्रीक्षेत्र बजाजा कमेटी के तत्कालीन महामंत्री  अशोक गोयल का कहना है कि 1998 में लावारिस शवों के दाह-संस्कार का प्रकल्प शुरू हुआ। इससे पहले अस्थियां रखी रहती थीं। इस पर समिति ने विधिविधान से अनेक गंगाघाट में विसर्जन किया जाने लगा। इसके लिए अस्थि कलश लेकर जाते हैं। इससे मृतकों की अस्थियों की बेकदरी नहीं होती है।
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