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मासूम से दुष्कर्म की कोशिश के दोषी को 10 साल की कैद, कोर्ट ने कहा- दया का पात्र नहीं अभियुक्त

Fri, 24 Jan 2020 12:07 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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आगरा के थाना नाई की मंडी क्षेत्र में चार साल की बालिका से दुष्कर्म की कोशिश के आरोपी सैंया के नगला गलुआ निवासी अजय उर्फ दौला को दोषी पाते हुए स्पेशल जज (पोक्सो एक्ट) वीके जायसवाल ने दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। 
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वहीं जान से मारने की कोशिश में सात साल, पोक्सो एक्ट में छह साल और छेड़छाड़ में पांच साल के कठोर कारावास से भी दंडित किया। सभी सजा साथ-साथ चलेंगी। अभियुक्त पर 1.30 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया। इसमें से आधी धनराशि पीड़िता को अदा करने के भी आदेश किए हैं।

घटना 16 अप्रैल, 2016 की है। चार साल की बालिका घर के बाहर खेल रही थी। तभी अभियुक्त अजय आया। वह बालिका को अपने साथ घर के पीछे प्लाट में ले गया। उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश करने लगा। 
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दोषी ने मासूम को जमीन पर पटका था

उधर, बच्ची के नहीं मिलने पर परिजन तलाश करने लगे। बेटी की चीख सुनकर पिता और अन्य लोग आ गए। इस पर अभियुक्त अजय ने बच्ची को जमीन पर पटक दिया। बच्ची घायल हो गई। लोगों ने पीछा करके अभियुक्त अजय को पकड़ लिया। 

कोर्ट में स्पेशल लोक अभियोजक (पोक्सो एक्ट) विमलेश आनंद ने आठ गवाह और साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने अभियुक्त को दुष्कर्म, जान से मारने की कोशिश, छेड़छाड़ और पोक्सो एक्ट में सजा सुनाई।
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धारा और सजा

- धारा 376, 511 (दुष्कर्म की कोशिश) : दस साल का कठोर कारावास और 50 हजार जुर्माना लगाया।
- धारा 307 (जान से मारने की कोशिश) : सात साल का कठोर कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माना।
- 354 बी (छेड़छाड़) : पांच साल का कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना।
- पोक्सो एक्ट की धारा 9 (आर)/10 : छह साल का कठोर कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माना।
(सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी)

अभियुक्त ने घिनौना और गंभीर अपराध किया, दया का पात्र नहीं : कोर्ट

कोर्ट ने अपने निर्णय में टिप्पणी की कि नासमझ चार साल की बच्ची से अभियुक्त ने घिनौना और गंभीर अपराध किया है। इस कारण बच्ची को मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरना पड़ा, जिसकी कल्पना नहीं की जा सकती है। ऐसी घटनाओं से मानवता और समाज शर्मसार होता है। अभियुक्त दया का पात्र नहीं है। वह कठिन से कठिन सजा का पात्र है। 
 
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