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लखनऊ विश्वविद्यालय : 15 सीटें भरीं तो भी चलेंगे सेल्फ फाइनेंस कोर्स

Sun, 04 Aug 2013 05:34 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में अब पीजी, डिप्लोमा, प्रोफिशिएंसी, एमफिल के सेल्फ फाइनेंस कोर्स चलाने के नियम बदल दिए गए हैं। अब पहले की तरह 40 प्रतिशत सीटें भरने पर ही कोर्स चलाने की बाध्यता को खत्म कर केवल 15 सीटें भरने पर भी कोर्स को चलाने की अनुमति दे दी गई है। पिछले वर्षों तक 40 प्रतिशत सीटें न भरने के कारण बड़ी संख्या में विभिन्न कोर्सेज में छात्रों का आवेदन करना बेकार हो जाता था। इसके अलावा विश्वविद्यालय प्रशासन ने सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को तीन साल तक चलाने का भी निर्णय लिया है। उसे तभी बंद किया जाएगा जब उसमें बिल्कुल भी दाखिले न हों। साथ ही सभी कोर्सेज की फीस को भी समान स्तर पर लाने की कोशिश की गई है।
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एमएससी के सभी कोर्सेज में फीस में काफी अंतर था मगर अब उसका फीस स्ट्रक्चर लगभग बराबर कर दिया गया है। डिप्लोमा में भी फीस को समान स्तर पर लाने की कवायद है। यह बदलाव सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को चलाने के लिए प्रति कुलपति प्रो. एके सेन गुप्ता की अध्यक्षता में गठित कमेटी के सुझाव पर किया गया है। फिलहाल लविवि प्रशासन कुछ ऐसे नुस्खे लागू करने जा रहा है जिससे डूब रहे सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को बचाया जा सके।
लविवि में पीजी स्तर के सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है क्योंकि पिछले वर्षों में बड़ी संख्या में कोर्स बंद हो चुके हैं। इनकी संख्या 50 से भी अधिक है जिन्हें एक साल के लिए बंद किया गया था। फिलहाल नए कुलपति डॉ. एसबी निमसे सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को बचाने की पूरी कोशिश में हैं। वे गुणवत्तापरक पढ़ाई पर भी जोर दे रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंस के तहत चलने वाले एमबीए कोर्सेज में करीब 320 सीटें खाली रह गईं थी लेकिन उन्होंने दोबारा लिखित परीक्षा और साक्षात्कार करवाकर इसमें से अधिकांश सीटें भर ली हैं। अब वे पीजी के सेल्फ फाइनेंस कोर्सेज को भी चलाने में जुटे हुए हैं। इसके अलावा विभिन्न विभागों के अंतर्गत चल रहे कोर्स और इंस्टीट्यूट में पूर्व कुलपति प्रो. मनोज कुमार मिश्रा द्वारा रोटेशन प्रणाली लागू करने की व्यवस्था बदलकर इसे दोबारा एक्सपर्ट टीचरों के हाथ में देने की भी तैयारी है। पिछले दो साल पहले जो कोर्स एक्सपर्ट चला रहे थे, उनमें कोर्स के कंटेंट के मुताबिक मिलते-जुलते विभागों के अध्यक्षों को इसकी जिम्मेदारी रोटेशन के हिसाब से देने की व्यवस्था कर दी गई थी। अब इसे बदला जाएगा।
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दाखिला न मिला तो दूसरे कोर्स में आवेदन का मौका
अगर किसी भी छात्र को किसी विभाग के एक कोर्स में प्रवेश नहीं मिल पाया है तो वह चाहे तो दूसरे सेल्फ फाइनेंस कोर्स में आवेदन कर उसमें प्रवेश ले सकता है। इसके लिए भी लविवि प्रशासन ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। यह प्रक्रिया विभाग स्तर पर ही की जाएगी। दोबारा आवेदन के लिए अभ्यर्थी को फिर 800 रुपये का फॉर्म लेना होगा। उदाहरण के तौर पर अगर फिजिक्स विभाग में किसी को एमएससी फिजिक्स में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है तो वह इसमें दूसरे कोर्स एमएससी इलेक्ट्रॉनिक्स और एमएससी रिन्यूवल एनर्जी में सीट रहने पर प्रवेश ले सकेगा।

पीजी कोर्सेज में इस बार बहुत कम आए आवेदन
लविवि में पीजी, डिप्लोमा, प्रोफिशिएंसी आदि के कुल 128 कोर्सेज में इस बार 9600 फॉर्म आए हैं। इसमें से कई ऐसे हैं जिनमें एक-एक आवेदन आए हैं तो करीब एक दर्जन ऐसे हैं जिसमें पांच से 13 आवेदन आए हैं। 128 में करीब 50 से ज्यादा कोर्स ऐसे हैं जिन्हें इस बार बचा पाना लविवि के लिए कड़ी चुनौती है।

इनमें आए सिर्फ एक-एक आवेदन
एमफिल मानव विज्ञान, एमए बायोस्टैटिस्टिक्स, एडवांस डिप्लोमा इन फूड प्रोसेसिंग, डिप्लोमा इन डेमोक्रेसी एंड गवर्नेन्स, पीजी डिप्लोमा इन एप्लाइड एथिक्स, प्रोफेशिएंसी इन अरेबिक, प्रोफेशिएंसी इन पाल्री

इन कोर्सेज में पांच से 13 आवेदन
एमए वीमेन स्टडीज, एमए इन अरेबिक, पीजी डिप्लोमा इन रिमोट सेंसिंग एंड जीआईएस, डिप्लोमा इन जर्मन, एडवांस डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग, डिप्लोमा इन हेल्थ एंड हाईजीन, प्रोफिशिएंसी इन फ्रेंच, पीजी डिप्लोमा इन ट्रेवल मैनेजमेंट

इन कोर्सेज की रही डिमांड
तीन वर्षीय एलएलबी, एमकॉम, एमए सोशियोलॉजी, एमए एप्लाइड इकोनॉमिक्स, एमए, एमएससी और एमकॉम के रेगुलर कोर्सेज।

इन समस्याओं का भी ढूंढ़ना होगा समाधान
- लविवि में सिर्फ एक-एक कमरे में कोर्स और इंस्टीट्यूट चलाए जा रहे हैं। ऐसे में उन्हें अब पर्याप्त संसाधन और सुविधा देनी चाहिए।
- जो प्रोफेशनल कोर्स हैं उनमें फीस तो ज्यादा है लेकिन विवि प्रशासन ने प्लेसमेंट की अच्छी व्यवस्था नहीं की। अब प्लेसमेंट पर भी जोर देना होगा।
- लविवि में कई विभिन्न विभागों में नए-नए कोर्स जब पूर्व कुलपति प्रो. आरपी सिंह के कार्यकाल में खुले थे तो उन्हें शिक्षकों ने अपनी दिलचस्पी के हिसाब से खोला था। लविवि प्रशासन ने पिछले साल व्यवस्था बदलकर रोटेशन प्रणाली लागू कर दी थी। उसे खत्म करना जरूरी है ताकि इन्हें एक्सपर्ट टीचर ही चलाएं।
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