अतंरराष्ट्रीय दर्जा मिलने के बाद उम्मीद थी कि अब लखनऊ से यूरोप, एशिया और अफ्रीका के देशों के लिए सीधी उड़ान आसान होगी।
हकीकत यह है कि प्रदेश की राजधानी होने के बावजूद लखनऊ के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से केवल खाड़ी देशों के लिए ही अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा उपलब्ध है।
दरअसल इसके लिए टर्मिनल थ्री बनाया जाना है और इसकी कल्पना साकार होने में जमीन सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
राजधानी के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर साल भर पहले 120 करोड़ रुपये की लागत से नया एयरपोर्ट टर्मिनल बनाकर रोजाना 26 घरेलू विमानों को उड़ाने की सेवा शुरू कर दी गई है।
नहीं बन सका मॉर्डन टर्मिनल
यहां बोइंग विमानों की लैंडिंग के लिए रनवे विस्तार और अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं वाला टर्मिनल नहीं बन सका। लखनऊ एयरपोर्ट ने पुराने भवन को ही दुरुस्त कर वहां से खाड़ी देशों को जाने वाली अंतरराष्ट्रीय विमानों की उड़ान शुरू कर दी है।
लखनऊ से सिंगापुर, बैंकाक, लंदन और मलेशिया की सीधी उड़ान के लिए कई विमान कम्पनियां लखनऊ आईं, लेकिन पुराने भवन में अंतरराष्ट्रीय दर्जे की यात्री सुविधा न देख वह वापस लौट गईं।
इसे देखते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय विमानों के लिए अलग से एक टर्मिनल थ्री बनाने का निर्णय लिया।
अतिक्रमण की भेंट चढी जमीन
बतौर राजीव अग्रवाल टर्मिनल थ्री के लिए एयरपोर्ट अपनी पुरानी बिल्डिंग से सटी और कानपुर छोर की ओर वाली जमीन का इस्तेमाल करना चाहता है। इस हिस्से की जमीन अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुकी हैं। पिछले दिनों एएआई के चेयरमैन राजीव अग्रवाल ने प्रदेश शासन के साथ मुलाकात कर अपने यहां की जमीनों से अतिक्रमण हटाने की मांग की थी।
राजीव अग्रवाल बताते हैं कि एएआई एक साल से लगातार यात्री सेवाओं को बेहतर करने के लिए लखनऊ एयरपोर्ट का विस्तार करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए बजट भी स्वीकृत हो चुका है। विस्तार के लिए जमीन पर अतिक्रमण ने दीवार खड़ी कर रखी है।
एयरोब्रिज को लेकर भी बवाल
नए टर्मिनल के पास बेहसा में पड़ने वाले फायर सर्विस के कार्यालय को हटाकर यहां दो एयरोब्रिज लगाने का प्रस्ताव है। यहां प्रवेश और निकास के लिए अभी एक-एक एयरोब्रिज लगा हुआ है। ऐसे में एक बार में केवल एक विमान ही एयरोब्रिज पर लग पाता है।
ऐसे में एक विमान जाने के बाद ही दूसरे विमान के आने तक यात्रियों को वेटिंग एरिया में इंतजार करना पड़ता है। बेहसा में दो एयरोब्रिज लगाने के लिए गांव वालों की आपत्त्ति का सामना एएआई को करना पड़ रहा है।
बनेगा एकीकृत भवन
यात्री सेवाओं को और बेहतर करने के लिए एक ही भवन में एएआई, डीजीसीए, कंट्रोल रूम और सहित कई अनुभागों के कार्यालय बनाने का प्रस्ताव है। यहां एकीकृत भवन के निर्माण के लिए भी एयरपोर्ट अथॉरिटी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है।