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मरीज की मौत पर सिविल में हंगामा

Sun, 30 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। कहीं सही इलाज न मिलने से हुई मौत तो कहीं गलत इंजेक्शन लगा देने के आरोप को लेकर परिवारीजनों ने शनिवार को हंगामा किया। पहली घटना डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल (सिविल) की है। शनिवार को एक मरीज की मौत के बाद उसके परिजनों ने हंगामा मचाया। उनका आरोप था कि डॉक्टरों ने बिना सही इलाज के मरीज को डिस्चार्ज कर दिया। दोबारा अस्पताल लाने के बावजूद उसकी मौत हो गई। सिविल अस्पताल में हैदरगढ़ बाराबंकी निवासी माया देवी (44) को 17 जून को भर्ती कराया गया था। माया के बेटे गुड्डू ने बताया कि उसके पित्ताशय में पथरी थी। 24 जून तक इलाज के बाद डॉक्टर ने माया देवी को डिस्चार्ज कर घर ले जाने की सलाह दी। अगले ही दिन फिर उनकी तबीयत खराब हो गई। परिजन उसे आनन-फानन में लेकर सिविल अस्पताल पहुंचे। जहां उसे फिर से भर्ती कर लिया गया। शनिवार को इलाज के दौरान ही माया देवी की मौत हो गई। मरीज की मौत से नाराज परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा मचाया। उनका कहना था कि यदि माया देवी को डिस्चार्ज न किया जाता तो मौत न होती। उधर केजीएमयू बाल रोग विभाग में बेड नंबर एक पर भर्ती सादिया (11 माह) के परिजनों ने शुक्रवार रात हंगामा किया। बताया जा रहा है सादिया के गुर्दे काम नहीं कर रहे हैं। शुक्रवार रात को उसे नर्स ने इंजेक्शन लगाया तो उसकी हालत बिगड़ने लगी। आनन-फानन में चिकित्सकों को बताया गया तो उन्होंने किसी तरह बच्ची की जान बचाई। परिजनों का आरोप था कि नर्स न्े इंजेक्शन अधिक डोज का लगा दिया था, इसलिए सादिया की हालत बिगड़ गई।
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नियोनेटल यूनिट में बेड फुल ः सुलतानपुर निवासी सिद्धार्थ अपने चार दिन के बच्चे रवि का इलाज करने केजीएमयू आए थे। पीलिया से पीड़ित रवि को बीत चार दिन से नियो नेटल यूनिट में बेड ही नहीं मिला। शनिवार को वहां बेड की आस में पहुंचे रवि को फिर से लौटा दिया गया। इस पर सिद्धार्थ ने हंगामा मचाया। किसी तरह उसे समझा बुझाकर वापस भेजा गया। गौरतलब है कि केजीएमयू के नियोनेटल यूनिट में 32 बेड हैं। सभी बेड अधिकतर भरे ही रहते हैं क्योंकि आसपास के 15-20 जिलों के गंभीर बच्चों के लिए एक मात्र नियोनेटल यूनिट है। इसके चलते वहां अधिकतर बच्चों को बिना भर्ती किए लौटना पड़ता है।
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