लखनऊ। पानी का उमड़ता सैलाब। उसकी चपेट में बहते अपने। बचाव के लिए उनका छटपटाना। पानी में हाथ-पैर मारना, लेकिन आप खड़े होकर सिर्फ बेबसी से उन्हें देख रहे हों। बचाने की इच्छाओं के बावजूद कुछ नहीं कर पा रहे हों। ऐसा दृश्य सुनकर ही अच्छे अच्छों का दिल कांप जाए। सोचिए जिस पर यह बीती हो उसका क्या ? जलालपुर फाटक के मदनखेड़ा निवासी आशीष पर ऐसी ही कयामत टूटी। आशीष की आंखों के सामने उसके माता-पिता और दो बहने सैलाब में बह रहीं थी और पहाड़ पर चढ़ा आशीष उन्हें बेबसी से देख रहा था। हिम्मत तो सैलाब के साथ बह गई, लेकिन आशीष की उम्मीदें अभी बाकी हैं कि शायद उसका परिवार मिल जाए। उसके परिवार को तलाशने के प्रयास जारी हैं। आशीष के चाचा अनिल शर्मा ने बताया कि 13 जून आशीष पिता रामनवल शर्मा, मां मालती, बहन पूजा व दीपा के साथ यात्रा के लिए निकला था। 16 जून को सभी लोग केदारनाथ से सात किमी दूर रामबाड़ा में थे। रात में उसके परिवारवाले रामबाड़ा में पहाड़ी के नीचे आराम कर रहे थे। आशीष घूमने के लिए पास स्थित पहाड़ी पर चढ़ गया। इसी दौरान मौसम का मिजाज बदला और तेज बारिश के साथ पानी का सैलाब आया। चारो तरफ चीख पुकार मच गई। हड़बड़ाए आशीष ने पहाड़ी के एक हिस्से को कसकर पकड़ लिया। पहाड़ी के नीचे आराम कर रहे उसके परिवार को इतना मौका ही नहीं मिला। सैलाब उसके माता-पिता और बहनों समेत कई लोगों को साथ बहाकर ले गया। वह चाहकर भी परिवार को बचाने के लिए कुछ नहीं कर पा रहा था। डर और सैलाब ने उसको जैसे बांध सा दिया हो। जब सैलाब थमा तो आशीष के अलावा वहां कोई नहीं बचा था। माहौल में पानी की गड़गड़ाहट के साथ थी तो सिर्फ दर्द और गुस्से से भरी आशीष की चीखें। अनिल बताते हैं कि आशीष से हादसे के बाद बात हुई। उसे सुरक्षित कैंप में पहुंचा दिया गया। बाद में वह लखनऊ के लिए रवाना भी हो गया। मुरादाबाद तक उससे फोन पर बात हुई लेकिन उसके बाद संपर्क नहीं हो सका। आशीष के लौटने के बाद उसका चचेरा भाई परिजनों की तलाश के लिए उत्तराखंड गया है। आशीष के पिता रामनवल शर्मा लखनऊ में ही रेलवे विभाग में कर्मचारी हैं।
आपदा राहत की हेल्प लाइन बेअसर ः केदारनाथ धाम में फंसे परिवारों की मदद के लिए बनी हेल्प लाइन बेअसर साबित हो रही हैं। सुबह से हेल्प लाइन पर संपर्क करने के लिए लोग परेशान रहे। इसके बाद भी किसी नंबर पर संपर्क नहीं हो सका। लखनऊ में यूपी सरकार की तरफ से बनाई गई हेल्प लाइन से लोगों को मदद नहीं मिली। इसके बाद जब ‘अमर उजाला’ ने हेल्प लाइन की हालत का जायजा लिया तो हालात वाकई खराब मिले। किसी भी नंबर पर संपर्क नहीं हो पा रहा था। हेल्प लाइन नंबर 6451993 पर कॉल करने के बाद लाइन ही कनेक्ट नहीं हुई। इस नंबर को ऑपरेटर कंपनी की तरफ से लगातार पहुंच से बाहर बताया जाता रहा। पहले तो 2236740 पर गलत नंबर होने की जानकारी मिली। वहीं करीब 12:15 बजे यह भी पहुंच से बाहर हो गया। तीसरा नंबर, 2238200 लगातार बिजी रहा। करीब 15 मिनट कोशिश के बाद भी संपर्क नहीं हो सका। भाजपा के युवा नेता आकाश दुबे ने फोन पर बताया कि जो हेल्प लाइन नंबर 24 घंटे काम करने चाहिए उन्हें पहले ही कार्यालय समय तक सीमित कर दिया गया हैैै। वहीं, सुबह 10 बजे के बाद भी हेल्प लाइन पर मदद करने के लिए कोई नहीं है। ऐसे में कैसे केदारनाथ या दूसरे इलाकों में फंसे लोगों की मदद हो सकती है।
दादा-दादी आप लोग कब आओगे ः शुभम जब-जब पूछता है कि मम्मी-पापा, दादा-दादी कब आएंगे। ये सुनकर पिता संतोष कुमार रस्तोगी की आंखों से आंसुओं की धारा फूट पड़ती है। बिहारीपुर सआदतगंज निवासी जल निगम से सेवानिवृत अयोध्या प्रसाद रस्तोगी (60) उनकी पत्नी हंसमुखी देवी (58) पांच जून को जनता टूर एंड ट्रेवल्स से चार धाम की यात्रा को निकले थे, लेकिन घटना के बाद से उनका पता नहीं है। संतोष बताते हैं कि माता-पिता से शनिवार 15 जून को आखिरी बार बात हुई थी तब उन्होंने बताया था कि हम रविवार को केदारनाथ के लिए निकलेंगे और हम सब ठीक हैं। उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ है। बुजुर्ग माता-पिता की कोई खोज खबर नहीं मिलने से घर में चिंता का माहौल है। फोन की घंटी बजती है तो इस आस में फोन उठाते हैं कि माता-पिता की कोई खैर-खबर मिल जाए, लेकिन कोई सुराग नहीं मिल रहा है।