लखनऊ। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल ने दलालों के सिंडीकेट तक पहुंचने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। प्रारंभिक जांच में लखनऊ के पॉलीटेक्निक स्थित ट्रेवल एजेंट शुभम सर्विस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। बाराबंकी से पकड़े गए दलाल विकास तिवारी के माध्यम से टीम जब एजेंट तक पहुंची तो खुलासा हुआ कि वह मुंबई के कुछ एजेंटों के संपर्क में है। इसके बाद रेलवे अधिकारियों ने इन एजेंटों के नाम मुंबई के अफसरों को बताए हैं। पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक राधेश्याम ने कहा कि बिना स्थानीय दलालों की मदद से मुंबई के दलाल यह गोरखधंधा नहीं कर सकते हैं। 15 जून को बाराबंकी से पकड़े गए दलाल विकास तिवारी ने बताया कि उसे शुभम सर्विस से टिकट मिला था। यह टिकट बाराबंकी स्टेशन पर एक यात्री को देना था, लेकिन रेलवे ने उसे पहले ही पकड़ लिया था। इसके एवज में एजेंट ने विकास को दो सौ रुपये व आने-जाने का किराया दिया था। रेलवे सूत्रों के मुताबिक शुभम सर्विस चलाने वाला ट्रेवल एजेंट लखनऊ, बाराबंकी का मुंबई के दलालों को देता था। इसी तरह कई दलाल चारबाग में भी हैं, जो लखनऊ में बैठे-बैठे मुंबई से कंफर्म टिकट निकलवाकर यात्रियों को उनके घर तक पहुंचा रहे हैं। इसके एवज में एजेंट को हजारों रुपये मिलते हैं। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ से गोरखपुर के बीच बस्ती, मनकापुर, गोंडा के दलाल मुंबई जाने वाले जरूरतमंद यात्रियों के संपर्क में रहते हैं। रेलवे के जानकार कहते हैं कि अगर स्थानीय दलालों पर आरपीएफ व स्थानीय पुलिस की मदद से नकेल लगा दी जाए तो सारा धंधा बंद हो जाएगा।
यात्री नहीं दे रहे जानकारी ः लखनऊ होकर मुंबई जाने वाली ट्रेनों में 80 फीसदी तत्काल टिकट मुंबई से बन रहे हैं। इन ट्रेनों में पकड़े जाने वाले बेटिकट यात्रियों की संख्या अभी तक अधिकतम 48 रही है। बाकी यात्रियों तक टीम नहीं पहुंच पाई। कारण जरूरतमंद यात्रियों व दलालों के बीच जबर्दस्त साठगांठ का होना है। यात्री संबंधित दलाल का नाम, फोन नंबर नहीं बताना चाहते। दरअसल, उन्हें डर होता है कि अभी कुछ पैसा खर्च करके आसानी से टिकट मिल जा रहा है, लेकिन खुलासा करने पर आगे टिकट मिलना मुश्किल हो जाएगा। टीम ने छापों के दौरान ऐसे यात्रियों से बातचीत की जिनके टिकट मुंबई के आसपास स्थित स्टेशनों से बने थे, लेकिन उन्होंने ज्यादा जानकारी नहीं दी। रेलवे अधिकारी कहते हैं कि नियमानुसार वह कुछ नहीं कर सकते, क्योंकि सभी यात्री अधिकृत टिकट लेकर सफर कर रहे होते हैं।
ट्रेवल एजेंट ने लीज पर लिया होटल ः टिकट दलाल मुनाफा कमाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। चारबाग स्टेशन के पास एक होटल में ट्रेवल एजेंट ने अपनी एजेंसी खोल रखी है। इससे होटल में आने वाले जरूरतमंद यात्रियों से संपर्क करने में आसानी होती है। रेलवे सूत्रों की मानें तो एजेंट ने होटल को लीज पर ले लिया है। आरपीएफ व जीआरपी की मिलीभगत से यह एजेंट निजी कंपनियों व होटल में रुकने वाले यात्रियों के टिकट बुक कराकर उन तक पहुंचाने का काम करता है। इसके एवज में यात्रियों से मनचाहा पैसा वसूला जाता है। वर्तमान में कुशीनगर एक्सप्रेस, गोरखपुर लोकमान्य तिलक सुपरफास्ट एक्सप्रेस व पुष्पक एक्सप्रेस के यात्रियों को तत्काल टिकट पहुंचाने में भी इस एजेंट की भूमिका संदिग्ध है। इसके अलावा कई और एजेंट भी सक्रिय हैं।
ई टिकट के नाम पर मनचाहा पैसा ः राजधानी में कहने को तो आईआरसीटीसी से अधिकृत एजेंटों की संख्या 2200 है, लेकिन अनाधिकृत रूप से इनकी संख्या आठ हजार से भी अधिक है। सिर्फ चारबाग में ही डेढ़ सौ से अधिक एजेंट अपनी दुकानें चला रहे हैं। इन एजेंटों की जांच के लिए आज तक न तो रेलवे ने कोई ठोस कदम उठाए और न ही आईआरसीटीसी ने यह जांचने की कोशिश की कि एजेंट अधिकृत है या नहीं। ये एजेंट यात्रियों से प्रति टिकट पचास रुपए तक वसूल रहे हैं। ई टिकट में छेड़छाड़ करके तो कई बार प्रतीक्षा सूची के टिकट को कंफर्म टिकट कर देते हैं। यही नहीं सामान्य टिकट को तत्काल टिकट कहकर भी यात्रियाें से पैसा ऐंठ रहे हैं। अधिकारी कहते हैं कि बिना शिकायत के वह किसी एजेंट पर कार्रवाई नहीं कर सकते।
अफसरों ने रेलकर्मी को किया तलब ः मुंबई जाने वाली स्पेशल ट्रेन (05031) में पकड़े गए तीन यात्रियों के मामले में एक और खुलासा हुआ है। ट्रेन में 15 जून को आई खान, आर खान व हामिद को लखनऊ में पकड़ा गया था। टीटीई ने टिकट जांच के दौरान पाया था कि संबंधित यात्रियों के पास मूल विंडो टिकट न होकर ई टिकट थे और इसे छेड़छाड़ करके तैयार किया गया था। जांच में पता चला था कि उनका टिकट गुजरात के सिराय स्टेशन से निकाला गया था, लेकिन टिकट न पहुंचने पर यात्रियों ने फर्जी ई टिकट तैयार कर लिया था। यही नहीं उन्होंने बलरामपुर स्टेशन पर तैनात वाणिज्य निरीक्षक केसरी से हस्ताक्षर व मोहर भी लगवा ली थी। टीटीई ने चार्ट में विंडो टिकट होने की बात कहते हुए मामला पकड़ा था। अब जांच कर रहे पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के अधिकारियों ने वाणिज्य निरीक्षक केसरी को मंडल कार्यालय तलब किया है। माना जा रहा है कि रेलकर्मी पर ठोस कार्रवाई होगी।