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किडनी ट्रांसप्लांट के लिए केजीएमयू को नहीं मिल रहे डॉक्टर

Sat, 08 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ह्यूमन ऑर्गन ट्रांसप्लांट (गुर्दा प्रत्यारोपण) विभाग पर इसके शुरू होने से पहले ही संकट के बादल मंडरा रहे हैं। एम्स की तर्ज पर लिवर और किडनी ट्रांसप्लांट के लिए एक ही विभाग बनाने के लिए जरूरी डॉक्टर नहीं मिल रहे हैं। चिकित्सकों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन भी निकाला गया लेकिन प्रोफेसर पद के किसी ने आवेदन ही नहीं किया। वहीं जिन पदों के लिए विज्ञापन आए हैं, उनके लिए अभी तक साक्षात्कार की तिथि घोषित नहीं की गई है।
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केजीएमयू में किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट खोलने की कवायद पूर्व कुलपति प्रो. महेंद्र भंडारी के कार्यकाल में ही शुरू हो गई थी। उनके प्रयासों से प्रदेश का सबसे सुसज्जित यूरोलॉजी विभाग भी केजीएमयू में बना था। इसके बाद विभागाध्यक्ष डॉ. दिवाकर दलेला को किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट शुरू करने की जिम्मेदारी दी गई। इसके लिए बाकायदा विज्ञापन भी निकाला गया लेकिन सिर्फ एक ही विशेषज्ञ डॉ. दीपक दीवान ने इसके लिए आवेदन किया। उस दौरान डॉ. दीवान का चयन भी कर लिया गया लेकिन उन्होंने केजीएमयू में ज्वाइन करने में रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद लगभग छह साल तक पूरी कवायद ठप रही। प्रो. डीके गुप्ता के कुलपति बनने के बाद एक बार फिर किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट की जगह एक अलग विभाग ह्यूमन आर्गन ट्रांसप्लांट डिपार्टमेंट बनाने का खाका खींचा गया। इसके लिए एक प्रोफेसर सहित पांच पदों का विज्ञापन भी निकाला गया लेकिन ये विज्ञापन भी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञों को केजीएमयू की तरफ आकर्षित नहीं कर पाया। सूत्रों के अनुसार प्रोफेसर के पद के लिए किसी ने आवेदन ही नहीं किया। जबकि असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए तीन सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजिस्ट और एक नेफ्रोलॉजिस्ट का आवेदन आया है। विशेषज्ञों के रुचि न लेने के कारण अभी तक साक्षात्कार की तिथि तय नहीं की गई है। गौरतलब है कि किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की कवायद में लगे केजीएमयू प्रशासन ने यूरोलॉजी विभाग के एक शिक्षक डॉ. राहुल जनक सिन्हा को दो साल के प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजा गया है लेकिन विशेषज्ञ न होने से विभाग के शुरू होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

कोट-
किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट के लिए अलग विभाग शुरू किया जाना है। एम्स मॉडल पर ये विभाग तैयार किया जा रहा है। आवेदनों की जांच की जा रही है। साक्षात्कार के लिए भी जल्दी ही फैसला लिया जाएगा। - प्रो. एस.एन.शंखवार, प्रवक्ता, केजीएमयू
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प्रत्यारोपण के लिए पीजीआई ही इकलौता केंद्र
गुर्दा प्रत्यारोपण के लिए संजय गांधी पीजीआई ही प्रदेश का इकलौता केंद्र हैं। वहां एक साल में 125 से 150 गुर्दा प्रत्यारोपण हो रहे हैं। इसके बावजूद मरीजों की लंबी वेटिंग हैं। गुर्दा फेल होने वाले लोगों की नेफ्रोलॉजी विभाग में डायलिसिस की जा रही है। वहां साल भर में 1000 से अधिक डायलिसिस की जाती है।
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