लखनऊ। गोद दिए जा चुके बच्चे को अपना बेटा बता रही महिला निशा के रक्त के नमूने शनिवार को संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में लिए गए। इन नमूनों को सुरक्षित रख लिया गया है और अब हाईकोर्ट के अगले आदेश पर इनका डीएनए टेस्ट किया जाना है। एसजीपीजीआई सूत्रों ने बताया कि अनुवांशिकी विभाग की प्रो. सुरक्षा अग्रवाल ने महिला और बच्चे के रक्त के 5-5 एमएल नमूने लिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक इन्हें संस्थान में ही प्रोफेसर की निगरानी में रखा गया है और कोर्ट का आदेश हुआ तो अलग-अलग डीएनए रिपोर्ट तैयार करके इनका मिलान किया जाएगा। इसकी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जारी इस मामले में निशा ने जयपुर के एक दंपति को गोद दिए जा चुके बच्चे को अपना बच्चा बताते हुए डीएनए टेस्ट कराने की मांग की थी। इस पर हाईकोर्ट ने एक दिन पहले ही एसजीपीजीआई को इन दोनों के रक्त के नमूने लेने के लिए कहा था। टेस्ट के वक्त सुबह 10 बजे बच्चे को गोद लेने वाले जयपुर के दंपति और गोद देने वाले श्रीराम इंडस्ट्रियल अनाथालय की अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी भी एसजीपीजीआई में मौजूद रहीं।
कोई नहीं उठा रहा टेस्ट का खर्च ः बच्चे की मां होने का दावा पुख्ता करने के लिए निशा ने डीएनए टेस्ट कराने के लिए हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया था। साथ ही बताया था कि वह इस टेस्ट का खर्च नहीं उठा सकेंगी। कोर्ट ने बच्चे को गोद ले चुके दंपति और रुचि त्रिपाठी से टेस्ट का खर्च उठाने के लिए पूछा था। हालांकि इन्होंने भी इसके लिए मना कर दिया। इस पर कोर्ट ने एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके शर्मा को निर्देश दिया कि किसी से टेस्ट का शुल्क न लिया जाए। साथ ही इसका बिल हाईकोर्ट भिजवाया जाए। इसके पेमेंट पर कोर्ट बाद में आदेश देगा।
रुचि ने निशा के दावे को गलत बताया ः अनाथालय की अधीक्षिका रुचि त्रिपाठी ने हाईकोर्ट को दिए अपने बयान में कहा कि निशा बच्चे की मां नहीं हैं। उन्हाेेंने कहा कि बच्चे की असली मां कोई और है और उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। वह बाराबंकी के बाबुरीगाओनी गांव में रहती है। साथ ही बताया कि इसकी जानकारी पुलिस को भी है। इस पर हाईकोर्ट ने रुचि को निर्देश दिए कि वह जिस महिला को बच्चे की असली मां बता रही हैं, उसे भी अगली तारीख पर कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल की तारीख तय की है।