लखनऊ। लेसा के बिलों की जांच में 78 लाख रुपये के घोटाले का मामला उजागर हुआ है। इसमें यह तथ्य सामने आया कि डिसऑनर हुए चेक की राशि को कुल राशि में से घटाया ही नहीं गया था। इससे लेसा को जहां करोड़ों रुपये का चूना लगने का अनुमान है, वहीं अभियंताआें की घोर लापरवाही भी उजागर हुई है। लेसा सूत्रों के मुताबिक अभियंता पूरे लखनऊ में ऐसी लापरवाही कर रहे हैं। अब जांच में परत दर परत खुलने से अभियंताआें में हड़कंप मचा हुआ है।इस मामले की जांच के लिए गठित टीम ने मात्र 157 बिलों की जांच की तो 78 लाख रुपये का घोटाला सामने आया। ये ऐसे उपभोक्ता थे जिनके चेक डिसऑनर हो गए। लेसा इस पर भी विचार कर रही है कि ऐसे उपभोक्ताओं के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाए, जिनके चेक डिसऑनर हुए। इसके साथ ही उन अभियंताओं पर भी कार्रवाई हो सकती है जिनके क्षेत्रों में चेक डिसऑनर मिले। अभियंताओं के मुताबिक, शनिवार को सेस दो में जमा हुए चेक की जांच की जाएगी, जिसके बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
दो साल में जमा हुए चेक की होगी जांच ः लेसा के वरिष्ठ अधिकारियों ने जल्द ही राजधानी में पिछले दो साल में जमा हुए सभी चेक की जांच के निर्देश दिए हैं। इस नई पहल से लेसा में हो रहे गोरखधंधे का राजफाश हो सकेगा। अभी तक उपभोक्ता द्वारा चेक से किए जा रहे भुगतान को कुल जमा की गई राशि में जोड़ दिया जाता था। उसके बाद चेक डिसऑनर होने पर वह राशि घटाई नहीं जाती थी। इससे लेसा को लाखों रुपये का चूना लग रहा था। अब जांच के दौरान पता लगाया जाएगा कि जितने चेक डिसऑनर हुए हैं, उन मामलों में संबंधित अभियंताओं ने क्या कार्रवाई की। ऐसे उपभोक्ताओं से दुबारा बिल लिया गया या नहीं। अभियंताओं ने चेक डिसऑनर होने पर कुल रकम में से वह राशि घटाई या नहीं।