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पॉलीटेक्निक छात्र ने फांसी लगा दी जान

Wed, 16 Jan 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। इंदिरानगर की इंसाफनगर कॉलोनी में पॉलीटेक्निक के छात्र ने मंगलवार तड़के फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेजने के साथ ही छानबीन शुरू की। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। बकौल पुलिस छात्र पढ़ाई के साथ इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग भी करता था। पुलिस नशेबाजी को आत्महत्या का कारण मान रही है। छात्र के घर वाले भी इससे इन्कार नहीं कर रहे।
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मूल रूप से रायबरेली के प्रगतिपुरम छजलापुर थाना मिल एरिया निवासी दिनेश द्विवेदी सिंहपुर ब्लॉक में एडीओ के पद पर तैनात हैं। वे अपनी पत्नी कमलेश, बेटा अवनीश द्विवेदी व एक बेटी के साथ पैतृक आवास पर रहते हैं। दिनेश का छोटा बेटा शिरीष द्विवेदी (19) इंदिरानगर में इंसाफनगर के सेक्टर-सी में किराए के मकान में रहकर गोमतीनगर स्थित पॉलीटेक्निक में सिविल की पढ़ाई कर रहा था। इसके साथ ही वह इंजीनियरिंग की तैयारी के लिए कोचिंग भी कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, शिरीष को मकान मालिक व मोहल्ले वालों ने सोमवार रात में देखा था। मकान मालिक की मानें तो शिरीष रात में खाना खाकर सो रहा था। मंगलवार भोर करीब चार बजे कमरे की लाइट जली, मगर कमरे में कोई हरकत नहीं हुई। सुबह देर तक दरवाजा न खुलने पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने दरवाजा खोलकर शव नीचे उतारा और छानबीन शुरू की। पुलिस को कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला।

मेल एवं सेलफोन की कॉल डिटेल खंगाल रही पुलिस
छात्र नशे का आदी था। उसकी इस आदत से परेशान उसकी मां कमलेश व बहन सोमवार को उसे समझाने आए थे। नशे के चलते उसके शरीर में जान नहीं रह गई थी। उसे कई बीमारियों ने जकड़ रखा था। पुलिस को कमरे से लैपटॉप व सेलफोन मिला है। पुलिस लैपटॉप के मेल एवं सेलफोन की कॉल डिटेल व एसएमएस खंगाल रही है।
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-रवींद्र नाथ सिंह,
बीट इंचार्ज


पिता की उम्मीद टूटी
दिनेश अपने छोटे बेटे शिरीष को बहुत प्यार करते थे। उन्होंने उसका भविष्य बनाने के लिए उसे लखनऊ भेजा। हर माह समय से मकान किराया, पढ़ाई व जेब खर्चा भेजते थे, मगर यहां दोस्तों की संगत में उसे सिगरेट व बीयर की लत लग गई। वह बुरी तरह नशे की चपेट में आ गया। माता-पिता व भाई-बहन ने उसे बहुत समझाया, मगर उसने नशा नहीं छोड़ा। जवान बेटे की मौत से पिता की सारी उम्मीदें टूट गईं। शिरीष की मौत से मां कमलेश व भाई-बहन का रो-रोकर बुरा हाल है।
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