बीस किलोमीटर लंबे कसया-रामकोला मार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण होना था। जिसमें से मात्र पांच किलोमीटर सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने कराया और उस पर 25 करोड़ रुपये खर्च कर दिए।
इतने पैसे में तो पूरी सड़क बन जानी चाहिए थी, क्यों नहीं बनी, इसका हिसाब जनता मांग रही है। इसको लेकर कई दिनों से क्षेत्र में जन आंदोलन चल रहा है।
विधानसभा चुनाव के पूर्व जो लोग इस सड़क की बदहाली के खिलाफ आंदोलन कर रहे थे, आज वे सत्तारूढ़ दल के विधायक हैं। पर ये दोनों एकदम खामोश हैं। इनकी खामोशी पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कसया-रामकोला के 20.4 किलोमीटर लंबे मार्ग के चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण के लिए 2009-10 में 39.89 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। कहा जा रहा है कि इसका कार्य वहां के अधिशासी अभियंता की किसी करीबी फर्म को मिला।
ठेकेदार ने रामकोला कस्बे के दक्षिण से तखरवां गांव तक चार किलोमीटर सड़क का निर्माण कराया। दूसरे छोर पर एक किलोमीटर सड़क का निर्माण कसया शहर में तब कराया गया, जब म्यांमार के एक बड़े नेता आने वाले थे।
हालांकि कहा जा रहा है कि इस सड़क का अधिकतर कार्य नगरपालिका की तरफ से कराया गया था। लोक निर्माण विभाग की तरफ से जो कार्य कराया गया उसके लिए 25 करोड़ रुपये का भुगतान होने की बात मुख्य अभियंता महेंद्र सिंह ने स्वीकार की है।
लोगों का कहना है कि विधानसभा चुनाव के पूर्व यहां के जो दो नेता सड़क को लेकर आंदोलन कर रहे थे, वे आज सत्ता में हैं लेकिन सड़क पहले से ज्यादा बदतर हो गई है। फिर भी ये नेता इसके लिए आवाज नहीं उठा रहे हैं। ऐसे में जनता का सड़क पर उतरना मजबूरी है।
इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता महेंद्र सिंह का कहना है कि 39.89 करोड़ में से 25 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। बीस किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण का लगभग 65 प्रतिशत कार्य हो चुका है। शेष शीघ्र पूरा हो जाएगा।