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आग, हवा और पानी को मात दे दुश्मन को खत्म कर देते हैं देश के घातक कमांडो, हर मिशन के फतह की गारंटी हैं ये जवान

Wed, 05 Feb 2025 07:56 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एनएसजी कमांडो विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले अभियानों, बंधक संकटों, आतंकवादियों से मुकाबला करने और दूसरे जटिल मुद्दों से निपटने का काम करते हैं।
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NSG Commando - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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एनएसजी यानी राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड भारत का एक विशेष सैन्य बल है। इस स्पेशल फोर्स को आतंकवाद या किसी गंभीर आंतरिक खतरों से निपटने के लिए बनाया गया है। इन्हें ब्लैक कैट कमांडो के नाम से भी जाना जाता है। साल 1984 में ऑपरेशन ब्लू स्टार और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद देश में अशांति का माहौल था। इसके अलावा आंतरिक स्तर पर सुरक्षा से जुड़े कई खतरे सरकार के समक्ष खड़े हो रहे थे। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने एनएसजी का गठन किया। 

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इसके बाद से एनएसजी राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा को सुनिश्चित करने का काम कर रही है। एनएसजी कमांडो विशेष रूप से उच्च जोखिम वाले अभियानों, बंधक संकटों, आतंकवादियों से मुकाबला करने और दूसरे जटिल मुद्दों से निपटने का काम करते हैं। मुंबई में हुए 26/11 हमले में बंधकों को छुड़ाने में NSG ने एक निर्णायक भूमिका निभाई थी, उसके बाद से इस बल की महत्ता और भी ज्यादा बढ़ गई है। 26/11 हमले के बाद कई अन्य ऑपरेशनों में भी NSG ने अपनी काबिलियत को साबित किया है।

एनएसजी कमांडो की ट्रेनिंग काफी कठिन होती है। इस ट्रेनिंग का उद्देश्य बेहद योग्य लोगों का चयन करना होता है। गौर करने वाली बात है कि एनएसजी कमांडो का चयन सीधे नहीं किया जाता है। एनएसजी कमांडो बनने के लिए सबसे पहले भारतीय सेना में भर्ती होना पड़ता है।

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इसके बाद ही इंडियन आर्म्ड या पैरामिलिट्री फोर्स जैसे आर्मी, सीआरपीएफ, बीएसएफ के जवानों में से ही एनएसजी कमांडो का चयन किया जाता है। एनएसजी कमांडो बनने के लिए आपकी उम्र 35 वर्ष से कम होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया में सबसे पहले कैंडिडेट की सेवा रिपोर्ट, शारीरिक और चिकित्सा फिटनेस की जांच की जाती है।

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कैसी होती है ट्रेनिंग

  • इस जांच के बाद जो जवान शॉर्टलिस्ट किए जाते हैं, उनको फिजिकल फिटनेस, मेंटल स्ट्रेंथ और मनोवैज्ञानिक टेस्ट में शामिल किया जाता है।
  • यह कोई आम टेस्ट नहीं होता है। इसमें कठिन से कठिन परिस्थितियों में जवान को मजबूत बने रहने की परीक्षा पास करनी होती है।
  • इसमें नींद की कमी, अत्यधिक दबाव और तनावपूर्ण माहौल में काम करने की ट्रेनिंग दी जाती है।
  • इसके अलावा फायरिंग टेस्ट, सर्वाइवल और कॉम्बैट ट्रेनिंग, वेट और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग आदि कई तरह के परीक्षण शामिल हैं।
  • यही नहीं, एडवांस ट्रेनिंग देने के लिए इन जवानों को देश के बाहर भी भेजा जाता है।
  • इसके अलावा आतंकवादियों से बंधकों को छुड़ाना, उनके ठिकानों पर छापा मारना आदि चीजों के बारे में भी बताया जाता है।
  • इनमें पास होने वाले कैंडिडेट को ही एनएसजी कमांडो के लिए चुना जाता है।

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कितनी होती है सैलरी

  • वहीं, बात अगर एनएसजी कमांडो की सैलरी की करें तो ग्रुप कमांडर की सैलरी 1 लाख रुपये और स्क्वॉड्रन कमांडर की 90 हजार रुपये प्रति माह होती है।
  • एनएसजी में दो स्पेशल एक्शन ग्रुप हैं। इसमें पहला 51 स्पेशल एक्शन ग्रुप और दूसरा 52 स्पेशल एक्शन ग्रुप है।

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खतरनाक मिशनों को अंजाम देने के लिए एनएसजी के पास कुल 5 प्रकार की टीमें हैं। आइए जानते हैं -

  • स्पेशल एक्शन ग्रुप (SAG)
  • स्पेशल रेंजर ग्रुप (SRG)
  • स्पेशल कंपोजिट ग्रुप (SCG)
  • इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट ग्रुप (ESG)
  • नेशनल बॉम्ब डेटा सेंटर (NBDC)
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