आपको इस बारे में पता होना चाहिए कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के ऊपर कई क्षेत्रों में रिसर्च चल रही है। उन्हीं में से एक का नाम डीप लर्निंग है। डीप लर्निंग में ही न्यूरल नेटवर्क आता है, जहां जेफ्री हिंटन ने कई खोजों को अंजाम दिया। इस क्षेत्र में हिंटन द्वारा की गई रिसर्च ने दुनिया भर में खूब सुर्खियां बटोरी। आज के समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बाजार में उनकी रिसर्च पर कई प्रोडक्ट का इस्तेमाल किया जा रहा है। वॉयस एंड इमेज रिक्गनिशन सॉल्यूशन उनमें से एक है।
क्या है वॉयस रिक्गनिशन सॉल्यूशन
वॉयस रिक्गनिशन सॉल्यूशन एक खास तरह की तकनीक है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से व्यक्ति की आवाज की विशिष्टताओं को पहचानकर उसे शब्दों में लिखने के लिए किया जाता है। आज के समय स्पीच टू टेक्स्ट, वर्चुअल असिस्टेंट जैसी तकनीकों में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।
इमेज रिक्गनिशन सॉल्यूशन
वहीं इमेज रिक्गनिशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की मदद से किसी चित्र के खास पहलुओं की पहचान की जाती है। इसमें इमेज का शेप, कलर, साइज, टैक्सचर जैसी चीजें शामिल हैं। आज के समय इस तकनीक का उपयोग फेसियल रिक्गनिशन, किसी वस्तु की पहचान करने और सेल्फ ड्राइविंग कार में किया जा रहा है।
इन खतरों को लेकर चिंतित हैं जेफ्री हिंटन
मिसइंफॉर्मेशन
निकट भविष्य में समाज के अंदर ध्रुवीकरण को बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। एआई तकनीक की मदद से डीपफेक वीडियोज और इमेज को बनाकर फेक न्यूज फैलाए जाएंगे। ऐसे में इस तकनीक के उपयोग से किसी एक संप्रदाय को दूसरे संप्रदाय के लोगों के खिलाफ भड़काया जा सकता है। गलत सूचनाओं के जरिए लोगों के बीच गलत धारणाओं को पैदा किया जा सकता है।
मंशा पर सवाल
अगर किसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का निर्माण गलत मंशा को ध्यान में रखकर किया जाए, तो क्या होगा? उदाहरण के तौर पर अगर किसी एआई प्रोग्राम को गलत डाटा सेट के साथ ट्रेन किया जाए, तो वह किसी खास संप्रदाय, ग्रुप या व्यक्ति विशेष के लिए पूर्वाग्रहों से भरा होगा। इससे समाज में कई तरह की समस्याएं देखने को मिल सकती हैं।
रोजगार
आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बढ़ चढ़कर उपयोग होने वाला है। कंटेंट राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग, इमेज डिजाइनिंग, डाटा एनालिसिस से लेकर कई जरूरी काम ऑटोमेट होने वाले हैं। इस कारण बड़े पैमाने पर लोगों के ऊपर रोजगार का संकट आ सकता है।
सरकार को दखल देने की है जरूरत
एआई का जिस तेजी से विकास हो रहा है। ऐसे में सरकार को इस क्षेत्र में अब देखल देने की जरूरत है। आने वाले वक्तों में एआई से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार को ऐसे मापदंडों को निश्चित करने की जरूरत है, जिससे उस तरह के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बाजार में आने से रोका जा सके, जो इंसानी मूल्यों के साथ तालमेल न रखते हों। सरकार को ऐसे कड़े कानून बनाने होंगे, जिनकी मदद से एआई से जुड़े दुरुपयोगों को रोका जा सके।
इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी वो क्या चीजें हैं, जिनके चलते आने वाले समय इंसानों को बड़े खतरे का सामना करना पड़ सकता है। उस पर सही दिशा से काम करने की जरूरत है।
जेफ्री हिंटन एआई द्वारा संचालित होने वाले ऑटोनोमस हथियारों से काफी चिंतित हैं। अगर यह तकनीक गलत हाथों में चली जाती है, तो इसके कई विनाशकारी परिणाम देश दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं।
साल 2015 में Neil Blomkamp की चेपी नामक एक शानदार फिल्म रिलीज हुई। फिल्म में एक ऐसे भविष्य की कहानी को दिखाया गया है, जहां मशीनीकृत रोबोट द्वारा पुलिस का काम किया जा रहा है। इसी बीच एक्टर देव पटेल उनमें से एक रोबोट को चुराकर उसमें कुछ खास तरह की प्रोग्रामिंग करते हैं। अल्गोरिदम कुछ इस तरह सेट होते हैं कि चेपी नामक यह रोबोट संवेदनशील हो जाता है। इसमें इंसानों की तरह खुद के होने और महसूस करने की क्षमता आ जाती है। शुरुआत में यह रोबोट एक छोटे बच्चे की तरह किसी चीज को देखकर डर जाता है। धीरे-धीरे यह रोबोट इंसानों की तरह ही चीजों को तेजी से जानना समझना और उनका विश्लेषण करना शुरू करता है। नतीजा यह निकलता है कि एक समय के बाद चेपी इंसानी चेतना को निकालकर उसको रोबोट में ट्रांसफर कर देता है। खैर यह एक फिल्मी कहानी है, लेकिन संभावनाएं अनंत हैं...