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Global Warming: गर्मी ने तोड़ा रिकॉर्ड, साल 2024 में दर्ज किया गया इतिहास का सबसे गर्म अप्रैल

Wed, 08 May 2024 01:47 PM IST
संकल्प सिंह यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाल ही में यूरोपियन यूनियन की क्लाइमेट मॉनिटरिंग सर्विस ने अपनी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी है कि साल 2024 का अप्रैल महीना अब तक के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा गर्म महीने के रूप में दर्ज किया गया है।
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Global Warming - फोटो : Istock
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विस्तार
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वातावरण में कार्बन उत्सर्जन बढ़ने के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में बढ़ोतरी हो रही है। इसका सीधा असर जलवायु परिवर्तन पर देखने को मिल रहा है। वैश्विक ताप वृद्धि की वजह से ग्लेशियर पिघल रहे हैं, समुद्र के जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है, जैव विविधता को नुकसान पहुंच रहा है, मौसम चक्र में परिवर्तन आदि कई प्राकृतिक समस्याएं देखने को मिल रही हैं। इन्हीं कारणों के चलते दुनियाभर के विभिन्न इलाकों में कहीं रिकॉर्ड गर्मी पड़ रही है, कहीं बाढ़ आ रही है तो कहीं ऐसी जगहों पर सूखा पड़ रहा है जहां लंबे समय से हरियाली थी। इसी बीच यूरोपियन यूनियन की क्लाइमेट मॉनिटरिंग सर्विस ने अपनी एक रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट के मुताबिक साल 2024 का अप्रैल महीना अब तक के रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा गर्म महीने के रूप में दर्ज किया गया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल महीने का औसत तापमान 15.03 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। 

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(1991 से 2020) इन तीन दशकों की तुलना में यह महीना 0.67 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म था। रिपोर्ट में इस बात का भी जिक्र है कि साल 2016 के अप्रैल महीने की तुलना में इस साल का अप्रैल महीना 0.14 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म है। इससे पहले साल 2016 के अप्रैल महीने को सबसे गर्म अप्रैल के महीने के तौर पर दर्ज किया गया था। 

1850-1900 जो कि औद्योगीकरण का शुरुआती दौर था। यह वह समय था जब वातावरण में उतनी ज्यादा मात्रा में ग्रीन हाउस गैसें नहीं थीं। 1850-1900 के औसत तापमान की तुलना में अप्रैल 2024 का महीना 1.58 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म हो चुका है।   

यूरोपियन यूनियन की क्लाइमेट मॉनिटरिंग सर्विस के वैज्ञानिकों के मुताबिक इस साल की शुरुआत में अलनीनो अपने उच्च स्तर पर चला गया था। वहीं अब पूर्वी ट्रॉपिकल प्रशांत महासागर की सतह का तापमान न्यूट्रल कंडीशन में जा रहा है। 

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वैज्ञानिकों ने यह भी बताया है कि अल नीनो एक प्राकृतिक घटना है, जिसके चलते तापमान घटता और बढ़ता रहता है। वहीं वातावरण में कैद ग्रीन हाउस गैसें एक अतिरिक्त कारक बन रही हैं, जिसके चलते वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि देखने को मिल रही है।
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