विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने महिलाओं को नौकरी करने के लिए अपने परिवार के साथ डोकलाम जैसी कूटनीति अपनाने की नसीहत दी है। गुजरात में आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से आयोजित चर्चा के दौरान ‘महिला टाउन हॉल’ में विदेश मंत्री ने बताया कि परिवारवाले यदि नौकरी करने देना नहीं चाहते हैं तो महिलाओं को क्या करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आपको परिवार के लिए कामकाजी महिलाओं के फायदे बताने होंगे। यदि परिवारवाले फिर भी तैयार नहीं होते हैं तो डोकलाम गतिरोध पर भारत ने जिस तरह चीन के साथ कूटनीति अपनाई, वही नीति अपनानी चाहिए।
महिलाओं के मुद्दे तीन वर्गों में विभाजित हैं। एक, सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा, दूसरा आजादी से और तीसरा सशक्तीकरण से जुड़ा मुद्दा। पहला मसला लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ा है कि समाज उन्हें पैदा होने की इजाजत देता है या नहीं।
मुझे समझ नहीं आता कि इस देश में जहां महिलाओं को भगवान की तरह पूजा जाता है, दो नवरात्रि मनाई जाती है, उसके बावजूद लोग गर्भ में ही कन्या भ्रूण की हत्या कर देते हैं।
उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा के लिए देश में कई कानून हैं लेकिन प्रधानमंत्री का मानना है कि कानून अकेले इस बुराई से नहीं लड़ सकता इसलिए सामाजिक बदलाव जरूरी है। हमने देश में बड़े पैमाने पर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ मुहिम शुरू की है। महिलाओं की सुरक्षा के लिए केंद्र और राज्य सरकारों ने कई ठोस कदम उठाए हैं।