गुस्सा, सवाल और अंतहीन दर्द
विनेश के वेट-मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवाल उठे। यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडबल्यूडबल्यू) में की गई अपील खारिज हुई। फिर खेल पंचाट में उम्मीद की आखिरी किरण भी बुझ गई। कहते हैं खिलाड़ी शारीरिक चोट से जल्दी लौट आते हैं, लेकिन दिल पर लगे घाव भरने में बहुत समय लगता है। विनेश के साथ भी यही हुआ। उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे दर्दनाक अध्याय बताते हुए संन्यास की घोषणा कर दी। भारत ने सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं खोई, उसने एक ऐसा मौका खो दिया जिसकी प्रतीक्षा एक सदी से ज्यादा समय से थी।
सपने टूटने का दर्द वह नहीं झेल सकीं। डिस्क्वालिफिकेशन के बाद विनेश के रोने की तस्वीरें दिल दहला देने वाली थीं। विनेश ने सेमीफाइनल जीतने के बाद और सात अगस्त को निर्णय आने से पहले वजन घटाने के लिए क्या कुछ नहीं किया। रस्सी कूदा, बाल कटवाए, कपड़े छोटे करवाए, रात भर एक्सरसाइज करती रहीं, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इससे विनेश की तबीयत और बिगड़ गई थी। भारत लौटने पर उनका भव्य स्वागत हुआ...एक चैंपियन की तरह।
इतना सम्मान पाकर और अपने फैंस के लिए पदक नहीं जीत पाने की टीस की वजह से वह दुनिया के सामने रो पड़ीं। यहीं से उन्होंने कुश्ती को छोड़ने का फैसला ले लिया था। पर कहते हैं न कि एथलीट मैदान छोड़ सकता है, पर मैदान उसके भीतर कभी नहीं छूटता। विनेश ने उस स्वर्ण के अधूरे सपने को पूरा करने का ठान लिया है। वह एक बार फिर कुश्ती में वापसी करने जा रही हैं।