अमर उजाला से खास बातचीत के दौरान विनेश फोगाट ने संन्यास के फैसले पर चर्चा की। आइये जानते हैं....
सवाल: आज आपको सम्मानित किया गया है। इस पर आप हमारे दर्शकों को क्या कहना चाहेंगी?
जवाब: देखो मैं बहुत किस्मत वाली हूं और मैं बहुत शु्क्रगुजार हूं। जब मैं मेडल से चूक गई थी तब मुझे लग रहा था कि मुझसे बदकिस्मत कोई नहीं है लेकिन जब मैं अपने देश में आई, अपने लोगों के बीच आई तो मुझे महसूस हुआ कि मैं बहुत भाग्यशाली हूं। मैं अपने आप पर परमात्मा का बहुत आशीर्वाद समझती हूं, इतना मान-सम्मान प्यार मुझे मिल रहा है। अब हिम्मत मिल रही है कि मैं फिर से वो मेडल ला सकती हूं, जो कहीं खो गई थी। अभी मुझे पता नहीं है कि मुझे करना क्या है लेकिन मैं इसका कर्ज कभी चुका नहीं पाऊंगी।
सवाल: सभी ने आपसे आवाहन किया है कि दो साल बाद होने वाले कॉमनवेल्थ खेलों में देश का परचम फिर से लहराएं, तो क्या इस पर आप पुनर्विचार करेंगी?
जवाब: देखिये कॉमनवेल्थ खेलों में मेरे मेडल काफी हैं। मैं चाहती हूं कि हमारी आने वाली पीढ़ी उसमें खेले। मैं उसमें बिल्कुल नहीं खेलूंगी। मेरा टार्गेट ओलंपिक था, वो सपना था। बस उस सपने में अगर जान आ गई, जो मैं चाहती हूं तो मैं निश्चित ही सोच सकती हूं। लेकिन अभी मैं उस स्थिति में नहीं हूं कि मैं फैसला ले सकूं कि करना क्या है।
सवाल: क्या आपके फैंस उम्मीद करें कि आप अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगी?
जवाब: मैं चाहती हूं कि फैंस मुझसे कम और हमारी आने वाली पीढ़ी से ज्यादा उम्मीद करें। वो देखें कि आपका परिवार आपके साथ खड़ा है कि आप हारें-जीतें, हम आपके पीछे खड़े हैं। हमारे भी सपने हैं कि हमारे आने वाले बच्चे आगे बढ़ें और उनका भी मान-सम्मान हो। हम उसमें भागीदार बनें, हम गर्व से कह सकें कि ये हमारे हैं। मेरा जितना था मैंने कर दिया। आगे मेरे मन में ताकत और हिम्मत आएगी तो मैं निश्चित ही एक मिनट के लिए नहीं संकोच करूंगी।
विनेश फोगाट का दिल्ली में जोरदार स्वागत हुआ है
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