एथलेटिक्स में देश को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले नीरज चोपड़ा ने कहा कि मैंने पहले ही सोच लिया था कि शुरुआती कुछ थ्रो में ही सर्वश्रेष्ठ करना है। ऐसा करने पर दूसरे खिलाड़ियों पर दबाव आ जाता है। दूसरा थ्रो करते ही मैं समझ गया था कि यह सर्वश्रेष्ठ है।
ओलंपिक से पहले नीरज ने स्वीडन में प्रशिक्षण लिया और कुछ यूरोपीय प्रतियोगिताओं में भी भाग लिया था। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मुझे ओलंपिक से पहले अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेलने का मौका मिला।
मैंने टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स), स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और एथलेटिक्स फेडरेशन से कुछ व्यवस्था करने का अनुरोध किया। उन्होंने व्यवस्था की और इस कारण मैं अब यहां पहुंचा हूं। ओलंपिक से पहले मुझ पर कोई दबाव नहीं था।
ऐसा लग रहा था, जैसे मैं पहले इन एथलीटों के खिलाफ खेल चुका हूं। इसलिए चिंता का कोई कारण नहीं था। मैंने सिर्फ अपने प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया। इससे मुझे स्वर्ण पदक जीतने में मदद मिली। नीरज 2008 में नॉर्वे के एंड्रियास थोरकिल्डसन द्वारा बनाए गए 90.57 मीटर के ओलंपिक रिकॉर्ड को तोड़ने की कोशिश कर रहे थे।
पदक जीतने का था विश्वास
नीरज ने कहा कि उन्हें हमेशा विश्वास था कि वह इस स्पर्धा में पदक जीतेंगे। यहां तक कि जब उन्होंने दूसरे प्रयास में अपना सर्वश्रेष्ठ 87.58 मीटर थ्रो किया, तब भी उन्हें यकीन नहीं था कि उन्हें स्वर्ण मिलेगा। मेरे मन में था कि मुझे एथलेटिक्स के लिए पदक जीतना चाहिए। तब टोक्यो में भारत के खाते में कोई स्वर्ण नहीं था। लेकिन जब मैं अपने रनवे पर होता हूं, तो मैं इसके बारे में नहीं सोचता। मैं बस अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता हूं। पूरा ध्यान जेवलिन पर था।
अगर पहला थ्रो अच्छा जाता है, तो दबाव दूर हो जाता है। ऐसा ही हुआ। पहला थ्रो अच्छा गया और दूसरा थ्रो भी बहुत अच्छा था। तब मैं ओलंपिक रिकॉर्ड को लक्ष्य बना रहा था और मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। जैसा कि मैंने पहले कहा था यह एक बहुत ही तकनीकी स्पर्धा है। इसलिए अपनी पूरी शक्ति और गति का उपयोग करने के बावजूद इससे बेहतर नहीं हो सका। मेरा अगला लक्ष्य 90 मीटर की दूरी को पार करना है। -नीरज चोपड़ा
मेरे इस पदक से बदलेंगी चीजें
नीरज का मानना है कि देश में बहुत प्रतिभाएं हैं और समग्र दृष्टिकोण के साथ कई एथलीट होंगे, जो ओलंपिक में देश को गौरवान्वित करेंगे। एथलेटिक्स (ओलंपिक में) में हम पहले थोड़े से अंतर से पीछे रह गए थे। पीटी उषा जी बहुत थोड़े से अंतर के कारण पदक हासिल करने से चूक गईं। अब पदक के साथ मुझे उम्मीद है कि चीजें बदल जाएंगी। भारत में बहुत प्रतिभाएं हैं और उन्हें बढ़ावा दिया जाएगा। हम ओलंपिक में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर कर सकते हैं।
अंजू ने कहा, एयरपोर्ट पर लेने आऊंगी
जीत के बाद नीरज ने लांग जंपर अंजू बॉबी जॉर्ज से भी बात की। अंजू ने उन्हें बधाई दी और कहा कि वे उनके भारत आने का इंतजार कर रही हैं और उन्हें लेने एयरपोर्ट आएंगी। इस पर नीरज ने उनका शुक्रिया अदा किया और बोले कि वे उनके नक्शेकदम पर ही चल रहे हैं।
इंडिगो देगी एक साल तक निशुल्क यात्रा की सुविधा : निजी विमानन कंपनी इंडिगो ने घोषणा की कि वह नीरज चोपड़ा को एक वर्ष तक असीमित निशुल्क यात्रा करने की सुविधा देगी।
बीसीसीआई पदक विजेताओं को देगी इनाम
बीसीसीआई सचिव जय शाह ने रजत पदक विजेताओं को 50-50 लाख, कांस्य विजेतओं को 25-25 लाख और कांसा जीतने वाली पुरुष हॉकी टीम को 1.25 करोड़ रुपये देने की घोषणा की।