विश्व बैडमिंटन चैंपियनशिप में जो कारनामा अब तक साइना नेहवाल नहीं कर पाई थीं वह दूसरी साइना कही जा रही पीवी सिंधू ने कर दिखाया।
18 साल की सिंधू पहली बार इस चैंपियनशिप में खेलने उतरीं और उन्होंने सेमीफाइनल में पहुंचने का इतिहास बना डाला।
टूर्नामेंट में शुक्रवार को कांस्य पदक पक्का करने के साथ ही यह हैदराबादी बाला साइना की छाया से भी बाहर निकल आईं।
भारत की नई बैडमिंटन स्टार सिंधू ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए सातवीं सीड चीन की शिजियान वांग को लगातार गेमों में 21-18, 21-17 से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।
सिंधू सिंगल्स वर्ग में 1983 के बाद कांस्य पक्का करने वाली पहली भारतीय हैं। इससे पहले प्रकाश पादुकोण ने कोपेनहेगन में कांस्य जीता था।
वहीं महिला डबल्स में 2011 में लंदन में हुए पिछले संस्करण में ज्वाला गुट्टा और अश्वनी पोनप्पा की जोड़ी ने कांसे पर निशाना लगाया था। सिंधू का अगला मुकाबला रत्चानोक इंतोनान से होगा, जिन्होंने कैरोलिना को 21-18, 20-22, 21-15 से हराया।
हैदराबाद की जूनियर एशियाई चैंपियन सिंधू ने वांग को 55 मिनट में तारे दिखा दिए। सिंधू ने पूरे मैच के दौरान वांग के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया और मैच पर से अपनी पकड़ को एक बार भी फिसलने नहीं दिया।
दसवीं वरीयता प्राप्त सिंधू को पहले दौर में बाई मिली थी। उन्होंने दूसरे दौर में जापान की काओरी इमाबेप्पू को पराजित किया और प्री. क्वार्टर फाइनल में दूसरी सीड और गत चैंपियन चीन की यिहान वांग को हराकर टूर्नामेंट का सबसे बड़ा उलटफेर किया।
मैं बहुत खुश हूं कि सब कुछ मेरी योजना के अनुसार हुआ। अपनी पहली ही विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतना बडे़ गर्व की बात है, लेकिन मैं यहीं नहीं रुकना चाहती। मेरा ध्यान सेमीफाइनल पर लगा है।--पीवी सिंधू