सिर्फ फुटबॉल ही नहीं इंचियोन एशियाई खेलों में होने वाले कुल 38 खेलों में से 15 के भाग लेने पर तलवार लटकी है।
भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने फुटबॉल के अलावा टेबल टेनिस, बास्केटबाल, हैंडबाल, सेपक टाकरा को भी एशियाई खेलों में नहीं भेजने की सिफारिश की है। इसके अलावा 10 खेल ऐसे हैं जिन्हें सरकारी खर्च के बिना भी नहीं भाग लेने की संस्तुति की गई है। इनमें तलवारबाजी, बॉलिंग, बेसबॉल, सॉफ्टबॉल, रग्बी, कराटे, ट्रायथलन, सॉफ्ट टेनिस, मॉडर्न पेंटाथलन प्रमुख हैं।
जबकि क्रिकेट ने खुद ही इन खेलों में भाग नहीं लेने का निर्णय लिया है। अब यह खेल मंत्रालय पर निर्भर करेगा कि कितने खेलों और कितने बड़े दल को एशियाई खेलों में भाग लेने की मंजूरी मिलेगी।
खास बात यह है कि क्रिकेट को छोड़ आईओए ने सभी खेलों की एंट्री साई को भेजी है। इनमें से 15 खेलों पर साई ने कैंची चलाई है। एशियाई खेलों में टीम भेजने का मानक साई ने पिछले एशियाई खेलों में टीम इवेंट में आठवां स्थान और व्यक्तिगत इवेंट में छठा स्थान निर्धारित किया है।
सबसे हैरानी जनक निर्णय फुटबॉल, टेबल टेनिस, बास्केटबॉल और हैंडबाल को लेकर है। साई ने इंचियोन में 28 खेलों में 72 से 100 पदक जीतने का अनुमान लगाया है।
फुटबॉल से उसने चौथे से पांचवें स्थान, हैंडबाल से छठे से सातवें स्थान, बास्केटबॉल से पांचवां या छठा स्थान, टेबल टेनिस से चौथे से छठे स्थान की उम्मीद जताई है। बावजूद इसके इन्हें रोके जाने की सिफारिश की गई है।
इन खेलों को लेकर साई की इस संस्तुति के बाद ही विवाद पैदा हुआ है। साई महानिदेशक जीजि थामसन ने इन 4 खेलों के बारे में कोई खुलासा नहीं किया, लेकिन बाकी 10 खेलों को रोके जाने की अपनी सिफारिश के बारे में कहा कि इन खेलों में हमारा स्तर काफी खराब है। इनमें टीम भेजने का कोई मतलब नहीं है।
वहीं, भारतीय तलवारबाजी संघ (एफसीआई) के अध्यक्ष डीडी बोरो का कहना है उन्हें पिछली बार भी नहीं भेजा गया था। उन्होंने एंट्री भेजी है। तलवारबाजों को एशियाई खेलों से रोकना ठीक नहीं है।