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सचिन छोड़ना चाहते थे क्रिकेट, आत्मकथा में सचिन का खुलासा

Sun, 02 Nov 2014 05:28 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
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सचिन को भले ही लोग अब क्रिकेट के भगवान वाला सम्मान न दें, लेकिन एक समय ऐसा था जब उनकी धुंआधार बल्लेबाजी के रिकार्ड पर उन्हें क्रिकेट के भगवान की तरह मान रहे थे। लेकिन यही वह समय था जब वह क्रिकेट से सबसे ज्यादा दुखी थे।
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सचिन जब टीम इंडिया की कप्तानी कप्तानी से इतना तंग हो आ गए थे कि उन्हें लगा कि वह हमेशा के लिए क्रिकेट छोड़ दें। ऐसा हम नहीं कह रहे बल्कि सचिन ने अपनी आत्मकथा के जरिए खुद इस बात को उजागर किया है।

टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, 41 वर्षीय पूर्व बल्लेबाज के सचिन तेंदुलकर ने क्रिकेट छोड़ने से पहले अंतर्राष्ट्रीय स्तर के लगभग सभी रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। सचिन ने अपनी आत्म कथा के जरिए उन सभी बातों का खुलासा किया है जिनके बारे में सिर्फ उन्हें ही पता था।
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छह नवंबर को रिलीज होगी आत्मकथा

'अपने ढंग से खेलते हुए'(Playing it My Way) नाम की आत्मकथा में सचिन अपने मुश्किल भरे दिनों को याद किया है। क्रिकेट से जुड़ी हर बात को बयान करने के अलावा अपने तनाव के दिनों के बारे में भी बयान किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सचिन ‌की यह आत्मकथा छह नवंबर को पुरी दुनिया में रिलीज होगी। सचिन ने इस किताब में बताया कि अपने कप्तानी वाले दिनों में उनके सामने ऐसी स्थित हो गई थी कि वह क्रिकेट को भूलकर इससे सन्यास ले लें।

इस पर उन्हानें लिखा है 'मुझे मैच हारना बुरा लगता था और ‌टीम का कैप्टन होने के नाते टीम के खराब प्रदर्शन के लिए मैं खुद को‌ जिम्मेदार मानता था। इस पर ज्यादा चिंता करने पर मुझे समझ नहीं आ रहा था कि मैं टीम को इस‌ स्थित से कैसे बाहर निकालूं। हालांकि मैं अपना पूरा योगदान देता था।' इस किताब उन्होंने अपनी पत्नी के बारे में भी लिखा है।
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अपनी पत्नी के बारे में क्या लिखा सचिन ने?

आत्मकथा में अपनी पत्नी अंजली के बारे में जिक्र करते हुए सचिन ने कहा,'मुझे उसमें (अंजली) कुछ ऐसा मिला है जैसे कि हार आंधी में उड़ते हुए इंसान को कोई पेड़ मिल जाए।'

उन्होंने आगे लिखा है कि जब किसी मैच को हारता तो मन बहुत ही दुखी होता। मैच ‌जीतने के लिए मैं अपनी ‌जी-जान लगा देता था। अब मुझे नहीं लगता इससे ज्यादा कुछ और करना चाहिए था।

सचिन की इस बहुप्रतीक्षित किताब के सह लेखक एक जाने माने खेल पत्रकार और इतिहासकार बोरिया मजूमदार हैं।

इसके अलावा सचिन की इस आत्मकथा में उन तमाम यादगार मैंचों और खिलाड़ी के बारे में जिक्र किया गया है जिन्होंने सचिन और खेल की दुनिया को प्रभावित किया है।
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