क्या यह जीत उनके जीवन की सबसे बड़ी जीत है? ओलंपिक रजत और विश्व चैंपियन बनना कौन सा बड़ा क्षण है?
मेरे लिए हर टूर्नामेंट में हासिल की गई जीत बेहद खास है। मैं किसी जीत की तुलना नहीं करना चाहती हूं। हां, लेकिन यह जीत बेहद खास है।
कोरियाई कोच किम जी ह्यून के आने के बाद आपके खेल में अलग निखार आया है। किम का साथ किस तरह खास रहा है?
पिछले कुछ माह से मैं मिस किम के साथ ट्रेनिंग कर रही हूं। हर एक कोच अपना अलग एक माइंडसेट होता है। उन्होंने मेरे खेल में कुछ परिवर्तन किए हैं। इन परिवर्तनों पर मैंने काफी मेहनत की है। खासतौर पर किम ने उनकी स्किल पर काम किया है। किम के साथ के बाद उनमें काफी सुधार आया है।
हाल की विफलताओं के बाद मानसिक रूप से मजबूती के लिए किसी पक्ष पर भी काम किया है?
किसी भी खिलाड़ी के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से फिट होना बेहद महत्वपूर्ण है। हां पिछले कुछ परिणामों के बाद मैंने सकारात्मक रहने की रणनीति अपनाई है। मैं अपने मन में कभी कोई नकारात्मक ख्याल नहीं लाती हूं। इसका मुझे बहुत ज्यादा फायदा हुआ है। यहां तक मैच में भी जब मैं अंक हार जाती थी तब सकारात्मक रहकर मैंने वापसी की।
आपने गोपी अकादमी से अलग हटकर फिजिकल ट्रेनर श्रीकांत के साथ काम करना शुरू किया है। आपने उन्हें विश्व चैंपियनशिप में अपने साथ ले जाने को भी कहा था। फिटनेस में उनके साथ जुड़कर कितना फायदा हुआ?
ऑन कोर्ट और ऑफ कोर्ट फिट रहना मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण है। मैं फिट रहने केलिए श्रीकांत के पास गोपी अकादमी से काफी दूर यात्रा कर सुचित्रा अकादमी तक जाती हूं। उनके साथ मैं पिछले दो सालों से काम कर रही हूं। उन्होंने मेरी फिटनेस में काफी सुधार किया है। कई पक्षों पर उन्होंने काम कराया है। फिट रहना ही मेरे अच्छे प्रदर्शन का बड़ा मंत्र है। श्रीकांत को मैं आगे के टूर्नामेंट में अपने साथ ले जाने की कोशिश करेंगी जिससे मुझे टूर्नामेंट के दौरान फिटनेस के पक्ष पर कोई दिक्कत नहीं आए।
गोपी अकादमी में पुरुषों के साथ प्रैक्टिस करना कितना फायदेमंद रहा है?
अकादमी में कई पुरुष खिलाड़ी हैं। इंडोनेशियाई स्पारिंग पार्टनर सेतियावान हैं। फिर किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय और साई परणीत के साथ भी मैं काफी खेलती हूं। हालांकि मैच नहीं कराए जाते हैं, लेकिन रैलियों, स्मैश और अन्य पक्षों को लेकर प्रैक्टिस होती है जिसका मुझे काफी फायदा मिलता है।