भारत की दूसरी साइना नेहवाल कही जा रही पीवी सिंधु ने मलेशिया ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए पांचवीं वरीयता प्राप्त सिंगापुर की जुआन जू को शनिवार को यहां कडे़ मुकाबले में 21-17, 17-21, 21-19 से हराकर अपना पहला ग्रां. प्री. खिताब जीत लिया।
शीर्ष वरीयता प्राप्त और दुनिया की 13वें नंबर की खिलाड़ी सिंधु ने एक लाख 20 हजार डालर इनामी राशि के इस टूर्नामेंट के फाइनल में जू को एक घंटे 11 मिनट तक चले मैराथन मुकाबले में हराकर खिताब पर कब्जा किया।
दोनों खिलाड़ियों के बीच यह तीसरा कैरियर मुकाबला था जिसमें सिंधु ने दूसरी बार जीत हासिल की। 17 वर्षीय सिंधु ने पहला गेम जीतकर बढ़त बनाई लेकिन वह दूसरा गेम हार बैठी।
निर्णायक गेम में सिंधु ने पिछड़ने के बावजूद जबर्दस्त वापसी करते हुए खिताब पर कब्जा कर लिया। इससे पहले किसी ग्रां. प्री. टूर्नामेंट में सिंधु का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2012 में रहा था जब वह लखनऊ में सैय्यद मोदी इंडिया इंटरनेशनल के फाइनल में पहुंची थीं। लेकिन उन्हें खिताबी मुकाबले में इंडोनेशिया की लिंडावेनी फनेत्री से शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
पहला गेम :-
सिंधु ने शानदार शुरुआत करते हुए 5-0 की बढ़त बनाई लेकिन जू इसे 4-5 करने में सफल रहीं और फिर उन्होंने 9-7 से बढ़त हासिल कर ली। सिंधु ने 8-10 से पिछड़ने के बाद लगातार पांच अंक जुटाए और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। हैदराबादी बाला ने पहला सेट 21-7 से जीतकर 1-0 की बढ़त बनाई।
दूसरा गेम :-
दोनों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला और एक-एक अंक पर दोनों आगे-पीछे होती रहीं। स्कोर के 15-15 पहुंचने के बाद जू ने लगातार तीन अंक जुटाए और फिर 21-17 से जीत दर्ज करते हुए मुकाबले में 1-1 से बराबरी हासिल कर ली।
तीसरा गेम :-
सिंधु ने अच्छी शुरुआत करते हुए 5-3 की बढ़त बनाई लेकिन जू ने इसके बाद लगातार पांच अंक जुटाते हुए 8-5 की बढ़त बनाई और फिर इस बढ़त को लगातार कायम रखा। वह एक समय 13-7 से आगे हो चुकी थीं लेकिन सिंधु ने न केवल इस अंतर को कम किया बल्कि 16-16 से बराबरी भी कर ली। सिंधु ने 18-17 से पिछड़ने के बाद लगातार तीन अंक जुटाए और स्कोर 20-18 कर दिया। जू ने एक अंक जुटाकर स्कोर 19-20 किया लेकिन सिंधु ने फिर एक अंक जुटाते हुए कैरियर का अपना पहला ग्रां. प्री. गोल्ड खिताब जीत लिया।
शानदार सिंधु :-
ग्रां. प्री. गोल्ड टूर्नामेंट जीतने वाली भारत की दूसरी खिलाड़ी हैं।
इससे पहले साइना नेहवाल ने 2006 में यह खिताब जीता था।