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PR Sreejesh: श्रीजेश ने नियमित रूप से ओलंपिक पदक जीतने का दिया मंत्र, टीम को इस चीज पर निर्भरता कम करने कहा

Thu, 15 Aug 2024 09:47 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत ने पेरिस ओलंपिक में लगातार दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के अपने सफर में 15 गोल किए और 12 गंवाए। इन 15 गोल में से नौ पेनल्टी कॉर्नर पर, तीन पेनल्टी स्ट्रोक पर और सिर्फ तीन मैदानी गोल थे।
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पीआर श्रीजेश - फोटो : PTI
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विस्तार
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भारतीय हॉकी टीम के पूर्व गोलकीपर पीआर श्रीजेश टोक्यो और पेरिस ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता टीम का हिस्सा रहे हैं। श्रीजेश ने भले ही हॉकी को अलविदा कह दिया है, लेकिन उन्होंने ओलंपिक खेलों में नियमित रूप से पदक जीतने का मंत्र दिया है। श्रीजेश का मानना है कि टीम को गोल करने के लिए पेनल्टी कॉर्नर पर निर्भरता कम करनी होगी क्योंकि हर बार पदक जीतने के लिए टीम को अधिक मैदानी गोल करने होंगे। 
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पेरिस ओलंपिक में भारत ने एस तीन मैदानी गोल किए
भारत ने पेरिस ओलंपिक में लगातार दूसरा ओलंपिक कांस्य पदक जीतने के अपने सफर में 15 गोल किए और 12 गंवाए। इन 15 गोल में से नौ पेनल्टी कॉर्नर पर, तीन पेनल्टी स्ट्रोक पर और सिर्फ तीन मैदानी गोल थे। ओलंपिक स्वर्ण जीतने वाले नीदरलैंड ने 14 और रजत पदक विजेता जर्मनी ने 15 मैदानी गोल किए, जबकि चौथे स्थान पर रहे स्पेन ने 10 मैदानी गोल दागे। पेनल्टी कॉर्नर तब मिलता है जब स्ट्राइकिंग सर्कल के भीतर कोई गलती हुई हो भले ही वह गोल स्कोर करने के लिए बने मूव को रोकने के लिए नहीं हुई हो। 

पेरिस ओलंपिक के बाद हॉकी को अलविदा कहने वाले इस महान गोलकीपर ने कहा, अधिकांश समय जब फॉरवर्ड सर्कल में जाते हैं तो उनका मकसद पेनल्टी कॉर्नर बनाना होता है क्योंकि हमारा पेनल्टी कॉर्नर अच्छा है। मैं यह नहीं कहता कि फॉरवर्ड गोल करने की कोशिश नहीं करते। अगर हमारे पास पेनल्टी कॉर्नर पर गोल करने का सुनहरा मौका है तो उसे गंवाना नहीं चाहिए। लेकिन हमें भारतीय हॉकी टीम को अगर अगले स्तर पर ले जाना है और लगातार ओलंपिक पदक जीतने हैं तो मैदानी गोल अधिक करने होंगे क्योंकि डिफेंस की भी सीमाएं होती हैं। मुझे कहना नहीं चाहिए लेकिन हम जर्मनी नहीं हैं कि 60 मिनट तक एक गोल बचा सके  उनकी रणनीति और शैली हमसे अलग है। हमने गलतियां की और कुछ गोल गंवाए, लेकिन हमारे फॉरवर्ड को अधिक गोल करने होंगे ताकि डिफेंस पर बोझ कम हो।
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दो ओलंपिक कांस्य, दो एशियाई खेल स्वर्ण और एक कांस्य, दो चैंपियंस ट्रॉफी खिताब, दो राष्ट्रमंडल खेल रजत के साथ श्रीजेश भारतीय हॉकी के लीजैंड बन चुके हैं जिनका नाम अब मेजर ध्यानचंद, बलबीर सिंह सीनियर, धनराज पिल्लै के साथ लिया जाता है। श्रीजेश ने कहा, उस लीग में होना आसान नहीं है। जब आप सीनियर हो जाते हैं, सुर्खियों में रहते हैं तो जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है। जूनियर खिलाड़ियों के प्रति भी जिम्मेदारी बढ़ती है। आप खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ के बीच मध्यस्थ हो जाते हैं। आप टीम के प्रवक्ता और देश के दूत बन जाते हैं और ऐसे में आपको मिसाल पेश करनी होती है।
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