मीराबाई चानू
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मीराबाई के आंसुओं ने बयां किया चार साल का संघर्ष
ओलंपिक पदक से चूकने के बाद राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारोत्तोलक साईखोम मीराबाई चानू से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने उनके भावुक होने का जिक्र किया। मोदी ने कहा, 'आंसू बह रहे थे, ऐसा लग रहा था जैसे आपके हर आंसू की बूंद से सोने का पदक टपक रहा हो।'
मीराबाई ने बताया कि उस दिन वह बेहद खुश और भावुक थीं। उन्होंने कहा कि पेरिस ओलंपिक में पदक से चूकने का दर्द उनके मन में था। इसके बाद चार वर्षों तक चोटों और पारिवारिक परेशानियों से जूझने के बाद जब वह राष्ट्रमंडल खेलों के पोडियम पर खड़ी हुईं, तिरंगे को ऊपर उठते और राष्ट्रगान को बजते देखा तो अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने कहा, 'वह चार साल का सफर बहुत मुश्किल था। जब मैं पोडियम पर खड़ी थी, तिरंगा ऊपर उठ रहा था और राष्ट्रगान बज रहा था, तो मैं अपने आंसू नहीं रोक पाई। आंसू अपने आप निकलते हैं।' प्रधानमंत्री ने मीराबाई की उपलब्धि को सिर्फ उनकी व्यक्तिगत सफलता मानने से इनकार करते हुए कहा कि उनकी जीत आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ी प्रेरणा है।
शर्मिला धनकर
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एक परिवार से आएंगे तीन पदक?
बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने पैरा एथलीट शर्मिला धनकर से उनकी बेटियों को लेकर किए गए पुराने वादे का भी जिक्र किया। मोदी ने कहा, 'पिछली बार आपसे एक वादा किया गया था कि आपकी दोनों बेटियां एथलीट बनेंगी।' शर्मिला ने इस पर कहा कि उनकी दोनों बेटियां अभी छोटी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले राष्ट्रमंडल खेलों तक एक ही परिवार में तीन पदक देखने को मिल सकते हैं।
खिलाड़ियों के पदक, युवाओं के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा
प्रधानमंत्री ने कहा कि वह पिछले करीब 12-13 वर्षों से इसी आवास में हैं और इस दौरान जिन लोगों का लगातार स्वागत करने और उनसे मिलने का अवसर मिला है, उनमें खिलाड़ी प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि यह खिलाड़ियों की पिछले एक दशक की मेहनत, भारत के लिए लगातार जीत हासिल करने और सफलता की नई ऊंचाइयां छूने का परिणाम है। मोदी ने कहा कि देश के स्कूलों में जाकर खेल और शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर भाषण दिए जा सकते हैं, लेकिन खिलाड़ियों के पदक बच्चों को इससे कहीं अधिक प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धियां केवल उनके व्यक्तिगत करियर की सफलता नहीं हैं, बल्कि वे देश के युवाओं को खेलों से जुड़ने और बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करती हैं।
लवलीना बोरगोहेन
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ग्लासगो के रेस्टोरेंट में भारत के नक्शे को लेकर लवलीना ने जताई आपत्ति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन से ग्लासगो के एक रेस्टोरेंट में भारत के नक्शे को लेकर हुई घटना के बारे में भी पूछा। लवलीना ने बताया कि यह राष्ट्रमंडल खेलों का आखिरी दिन था और भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। हर तरफ भारतीय खिलाड़ी मौजूद थे, ऐसे में उन्हें वहां दिख रहे नक्शे को लेकर कुछ बुरा लगा। लवलीना ने कहा कि उन्होंने वहां मौजूद लोगों से विनम्रता से बात की और नक्शे को बदलने का अनुरोध किया। उनकी बात मान ली गई और नक्शे को बदल दिया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस घटना को खिलाड़ियों के भीतर मौजूद देशभक्ति की भावना से जोड़ते हुए कहा कि जीत, खुशी और जश्न के बीच उस नक्शे पर ध्यान जाना और उस भावना को महसूस करना गहरे आंतरिक देशप्रेम को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि लवलीना का यह वीडियो असाधारण है और लोग इसे लंबे समय तक याद रखेंगे। पीएम मोदी ने भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन की भी तारीफ करते हुए कहा कि दुनिया भर के मुक्केबाज अब भारतीय मुक्केबाजों से डरने लगे हैं। इस पर मुक्केबाज साक्षी ने बताया कि विरोधी टीमें भारत के खिलाफ मुकाबले को लेकर चिंतित थीं। उन्हें लगता था कि वे पहला ही मुकाबला हार जाएंगी और पदक जीतने का मौका भी हाथ से निकल जाएगा।
'खेलो इंडिया' की प्रतिष्ठा बढ़ाने का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों से 'खेलो इंडिया' की प्रतिष्ठा और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसी योजना की प्रतिष्ठा सिर्फ रिबन काटने से नहीं बढ़ती, बल्कि तब बढ़ती है जब युवा छात्र या खेल में करियर बनाने की कोशिश कर रहा खिलाड़ी पूरे उत्साह और खेल भावना के साथ मैदान पर उतरता है। मोदी ने कहा कि देश को अभी बहुत लंबा सफर तय करना है और कई पदक जीतने बाकी हैं। उन्होंने खिलाड़ियों के प्रदर्शन को इस लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
जादूमणि सिंह
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जादूमणि ने कारगिल के शहीदों को समर्पित किया पदक
राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीतने वाले मुक्केबाज जादूमणि सिंह ने प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान अपने मुकाबले और कारगिल दिवस से जुड़ी याद साझा की। उन्होंने बताया कि जिस दिन उनका पाकिस्तान के मुक्केबाज से मुकाबला था, उसी दिन कारगिल दिवस भी था।
भारतीय सेना के सदस्य जादूमणि ने कहा कि वह पाकिस्तान को हराने के लिए दृढ़ संकल्पित थे और उन्होंने मुकाबला 5-0 से जीता। उन्होंने अपना पदक भारतीय सेना के कारगिल नायकों को समर्पित किया। प्रधानमंत्री मोदी ने जादूमणि के जज्बे की सराहना करते हुए कहा कि खुद एक सैनिक होने के नाते उन्होंने जिस भावना के साथ अपना पदक कारगिल के विजेताओं को समर्पित किया, उसने उनकी जीत की गरिमा और बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि जादूमणि ने उसी प्रतिद्वंद्वी को हराया जिसे हराना जरूरी था।
पाकिस्तानी मुक्केबाज ने कहा- नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है
राष्ट्रमंडल खेल 2026 के रजत पदक विजेता हैवीवेट मुक्केबाज नरेंद्र बेरवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान 2015 वर्ल्ड मिलिट्री गेम्स का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि उस मुकाबले में पाकिस्तानी मुक्केबाज को हराने के बाद उसने उनसे कहा, 'आपका नाम नरेंद्र है, आपके कोच का नाम नरेंद्र है और आपके प्रधानमंत्री का नाम नरेंद्र है। मुझे नरेंद्र नाम से नफरत हो गई है।' नरेंद्र बेरवाल ने यह किस्सा प्रधानमंत्री मोदी को सुनाते हुए उस मुकाबले की याद साझा की, जिसमें उन्होंने पाकिस्तानी मुक्केबाज को शिकस्त दी थी।
सीमा कालीरमना
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'आपने सिर्फ पदक नहीं बढ़ाए, पूरी पीढ़ी तैयार की'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रमंडल खेल 2026 के भारतीय पदक विजेताओं से बातचीत के दौरान कहा कि खिलाड़ियों की उपलब्धि केवल पदकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया है। उन्होंने कहा, 'ऐसा नहीं है कि आपने सिर्फ पदकों की संख्या बढ़ाई है, आपने एक पूरी पीढ़ी को तैयार किया है।'
'अब दोस्तों से कहूंगी- हां, मैं मोदी जी से मिली हूं'
डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीतने वाली सीमा कालीरमना ने प्रधानमंत्री से बातचीत के दौरान एक मजेदार किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि जब भी वह अपने दोस्तों को उनके भले के लिए कुछ करने की सलाह देती थीं, तो दोस्त उनसे कहते थे, 'क्या आप मोदी से मिली हैं? हम आपकी बात क्यों सुनें?' सीमा ने कहा कि अब वह अपने दोस्तों से गर्व से कह सकती हैं, 'हां, मैं मोदी जी से मिली हूं।'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
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'पदक तभी आते हैं जब देश में खेल संस्कृति विकसित होती है'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि खेलों के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करना जरूरी है, लेकिन किसी देश को पदक तभी मिलते हैं जब वहां खेल संस्कृति विकसित होती है। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने बड़ी उपलब्धि हासिल की है और देश का गौरव बढ़ाया है। मोदी ने खिलाड़ियों को बधाई देते हुए कहा, 'मैं आपको हृदय से बधाई देता हूं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप भविष्य में भी लगातार जीत हासिल करेंगे और हम एक बार फिर इसी जगह मिलेंगे।'
कॉमनवेल्थ गेम्स के खिलाड़ियों से पीएम मोदी की मुलाकात
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सीमित स्पर्धाओं के बावजूद भारत चौथे स्थान पर
ग्लासगो में भारत ने कुल 39 पदक जीते, जिसमें 13 स्वर्ण, 17 रजत और नौ कांस्य पदक शामिल रहे। भारत पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा। हालांकि, इस बार राष्ट्रमंडल खेलों का कार्यक्रम काफी सीमित था। कुश्ती, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और निशानेबाजी जैसे भारत के मजबूत पदक संभावनाओं वाले खेलों को शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में 39 पदकों के साथ चौथा स्थान हासिल करना भारतीय दल के प्रदर्शन को और खास बनाता है। भारत ने मुख्य रूप से मुक्केबाजी, जूडो, एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स में दमदार प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री ने रविवार को सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर खिलाड़ियों की मेजबानी पर खुशी जताते हुए कहा था कि सभी ने अपने असाधारण प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया है और उनकी सफलता कई युवाओं को प्रेरित करेगी।