ओलंपिक खेलों में निशानेबाजी प्रतियोगिता में भाग लेने आए भारतीय दल को उनके स्वाद के अनुसार भोजन ढूंढने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। खिलाड़ियों के लिए यहां दो ‘एथलीट गांव’ हैं लेकिन दोनों में ही भारतीयों को अपना पसंदीदा भोजन नहीं मिला। कुछ निशानेबाज स्थानीय दक्षिण एशियाई रेस्तरां पर निर्भर हैं, जबकि कुछ ने अपना खाना खुद पकाया है।
एक भारतीय निशानेबाज ने गोपनीयता की शर्त पर बताया, 'खाना ढूंढने में मुश्किल हो रही है, बस किसी तरह से काम चल रहा है।' पिस्टल कोच जसपाल राणा ने कहा, 'हम तो खुद बनाते हैं। मैंने राजमा चावल खाया। किराने की दुकान से जरूरी सामान खरीदा और अपने अपार्टमेंट में बनाया।'
वहीं कुछ अन्य निशानेबाज पेरिस में खेल गांव की चहल पहल की कमी महसूस कर रहे हैं। वे पेरिस में ही रहना पसंद करते। एक भारतीय निशानेबाज ने कहा, 'शूटिंग रेंज खूबसूरत है। लेकिन मैं मुख्य खेल गांव से दूर रहकर थोड़ा परेशान हूं।' उन्होंने कहा, 'यहां रहने की व्यवस्था ऐसी नहीं है जैसी मैंने सोची थी। लेकिन मैं प्रतियोगिता और जीतने के लिए यहां हूं।'
मनु भाकर के अलावा पहले दिन भारत के अन्य निशानेबाजों ने निराश किया। भारतीय पुरुषों की 10 मीटर एयर पिस्टल और 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम स्पर्धा के क्वालिफिकेशन चरण से ही बाहर हो गए। 10 मीटर एयर पिस्टल में रिदम सांगवान 573 के स्कोर के साथ 15वें स्थान पर रहीं। इससे पहले सरबजोत सिंह ओलंपिक खेलों के दबाव को झेलने में नाकाम रहे और मामूली अंतर से 10 मीटर एयर पिस्टल के फाइनल में जगह बनाने से चूक गए।
इन खेलों में डेब्यू कर रहे सरबजोत और अर्जुन चीमा ने टुकड़ों में अच्छा प्रदर्शन किया लेकिन क्रमश: 577 और 544 के स्कोर के साथ नौवें और 18वें स्थान पर रहे। भारतीय निशानेबाज 10 मीटर एयर राइफल मिश्रित टीम क्वालिफिकेशन चरण में बाहर हो गए।