रियो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता पहलवान साक्षी मलिक का मानना है कि ओलंपिक पदक जीतने से सिर्फ खिलाड़ी की जिंदगी नहीं बदलती बल्कि इसका असर समाज पर भी पड़ता है जिससे बच्चों के लिए कई मौके बनते हैं। साक्षी रियो 2016 में कांस्य से ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली महिला पहलवान बनी थीं।
शुक्रवार को एक इंटरव्यू में साक्षी ने कहा, "ओलंपिक का सपना सिर्फ खिलाड़ी का सपना नहीं होता बल्कि यह पूरे परिवार का सपना होता है। ओलंपिक पदक जीतने से सिर्फ खिलाड़ी का जीवन नहीं बदलता है, बल्कि उसके परिवार, समाज और गांव का जीवन भी बदल जाता है।"
'मेरे पदक जीतने के बाद कई बदलाव हुए'
महिला पहलवान ने बताया कि आठ साल पहले उनके पदक जीतने के बाद से उनके गृह शहर रोहतक में खेल के बुनियादी ढांचों में कई बदलाव हुए हैं। उन्होंने कहा, "मेरे पदक जीतने के बाद कई अहम बदलाव हुए। रोहतक में छोटू राम स्टेडियम अब एसी हॉल में बदल गया है। मेरे गांव में एक स्टेडियम भी बनाया गया और उसका नाम मेरे नाम पर रखा गया है।"
छह पहलवानों पेरिस ओलंपिक में खेलेंगे
पेरिस ओलंपिक के लिए भारत के छह पहलवानों ने क्वालfफाई किया है, जिसमें से पांच महिला पहलवान हैं जो विनेश फोगट (50 किग्रा), अंतिम पंघाल (53 किग्रा), अंशु मलिक (57 किग्रा), निशा दहिया (68 किग्रा) और रीतिका हुड्डा (76 किग्रा) हैं।