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Swapnil Kusale: ओलंपिक कांस्य पदक विजेता स्वप्निल कुसाले का भव्य स्वागत, प्रसिद्ध गणेश मंदिर में दर्शन किए

Thu, 08 Aug 2024 05:19 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

मध्य रेलवे ने भी कुसाले को पदोन्नत कर विशेष कार्य अधिकारी नियुक्त किया है। वह 2015 में मध्य रेलवे के पुणे डिवीजन में ‘कमर्शियल कम टिकट क्लर्क’ के पद पर शामिल हुए थे। कुसाले ने इससे पहले 2023 में चीन में एशियाई खेलों में, 2022 में बाकू में हुए विश्व कप और 2021 में नयी दिल्ली में स्वर्ण पदक जीते थे।
 
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स्वप्निल कुसाले - फोटो : ANI
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विस्तार
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पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाले निशानेबाज स्वप्निल कुसाले बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र के पुणे शहर पहुंचे जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। कुसाले ने पिछले हफ्ते 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशन स्पर्धा में पहला ओलंपिक कांस्य पदक जीता था।
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सुबह पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पारंपरिक ढोल-ताशा की थाप के बीच लोगों ने कुसाले का स्वागत किया। पश्चिमी महाराष्ट्र के कोल्हापुर के कुसाले ने इसके बाद शहर के बीचों-बीच स्थित प्रसिद्ध श्रीमंत दगडूशेठ हलवाई गणपति मंदिर में पूजा-अर्चना की। शहर के बालेवाड़ी स्थित श्री शिव छत्रपति खेल परिसर में शूटिंग रेंज में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। कुसाले के कांस्य पदक जीतने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें एक करोड़ रुपये का पुरस्कार देने की घोषणा की।

मध्य रेलवे ने भी कुसाले को पदोन्नत कर विशेष कार्य अधिकारी नियुक्त किया है। वह 2015 में मध्य रेलवे के पुणे डिवीजन में ‘कमर्शियल कम टिकट क्लर्क’ के पद पर शामिल हुए थे। कुसाले ने इससे पहले 2023 में चीन में एशियाई खेलों में, 2022 में बाकू में हुए विश्व कप और 2021 में नयी दिल्ली में स्वर्ण पदक जीते थे।
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स्वप्निल कुसाले - फोटो : PTI
अब माता-पिता के कष्ट दूर करने की बारी मेरी
स्वप्निल को जब पदक पहनाया जा रहा था तो उनकी नजर वहां मौजूद भारतीयों और तिरंगे पर थी। वह कहते हैं कि यह पदक भारत का है और देश को ही समर्पित है। स्वप्निल के निशानेबाजी के इस सफर में उनके पिता सुरेश महादेव कुसाले ने भी काफी संघर्ष किया। स्वप्निल भी कहते हैं कि माता-पिता ने उनके लिए बहुत कुछ दिया। अब उनके लिए करने की बारी मेरी है। स्वप्निल कहते हैं कि वह उनके सारे कष्टों को दूर करने की कोशिश करेंगे। उनकी माता-पिता से बात हुई, वह बेहद भावुक हो गए थे। उनसे बात कर मैं भी भावुक हो गया।

कोच ने नीलिंग पैड ठीक नहीं कराया होता तो दिक्कत हो जाती
स्वप्निल बताते हैं कि फाइनल से पहले वह नीलिंग पोजीशन को लेकर दिक्कत में थे। उनके निशाने सही नहीं बैठ रहे थे। वह परेशान थे। इस बारे में उन्होंने कोच दीपाली देशपांडे से बात की। अंत में पता लगा कि उनके नीलिंग पैड में दिक्कत है। यात्रा के समय यह पैड दब गया, जिसके चलते उनका घुटना इस पैड पर सही से सेट नहीं हो पा रहा था। इस कारण उनकी पोजीशन खराब हो रही थी, जिससे स्कोरिंग पर फर्क पड़ रहा था। कोच ने ही उन्हें पैड में टिश्यू पेपर भरवाए और तब पोजीशन ठीक हुई। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो उन्हें मैच में बड़ी समस्या आ सकती थी।
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