गरीबी की भट्टी में तपकर आसमां को छूने के उदाहरण अक्सर प्रेरणा बनते हैं, लेकिन यशस्विनी सिंह वह शूटर हैं जिन्होंने ऊंचे पद पर विराजमान माता-पिता की छाया में खुद को अलग मुकाम हासिल किया। यशस्विनी के पिता एसएस देसवाल आईटीबीपी के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और मां सरोज इंकम टैक्स कमिश्नर हैं।
यशस्विनी के पिता को 2010 दिल्ली कॉमनवेल्थ में कादरपुर बिग बोर शूटिंग रेंज में पदक समारोह के मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाया गया था। उस दौरान 13 साल की यशस्विनी भी साथ थीं। पूर्व आईजी और आईपीएस अधिकारी टीएस ढिल्लों कोच और रेंज इंचार्ज थे। यशस्विनी ने ढिल्लों से शूटिंग करने की इच्छा जताई। ढिल्लों कहते हैं कि पिता ने समझा बेटी वहां से जाने के बाद सब भूल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
एक दिन पिता का उनके पास फोन आया और कहा कि बेटी शूटिंग के लिए जिद कर रही है। उन्होंने यशस्विनी को पुरानी पिस्टल दी। पहले वह उसे बिना पिस्टल के ड्राई प्रैक्टिस कराते रहे। उसके बाद उन्होंने पंचकूला स्थित आवास में 10 मीटर की रेंज बनवा दी। तीन साल में यशस्विनी ने 2014 में यूथ ओलंपिक खेल लिया, जहां वह छठे स्थान पर रहीं। 2017 में वह जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनीं।
ढिल्लों के मुताबिक दिल्ली आने के बाद उन्होंने वहां भी उनके आवास पर रेंज बनवाई। 2016 ओलंपिक के लिए वह दुर्भाग्यशाली रहीं जो हाथ में आया कोटा हासिल नहीं कर पाईं, लेकिन इस बार उन्होंने गोल्ड के साथ कोटा भी हासिल कर लिया।
यशस्विनी मां सरोज के ज्यादा करीब है। वह कम खाती हैं जिसका उसे नुकसान भी उठाना पड़ा है। मां विदेशी टूर्नामेंटों में उसके साथ जाती हैं। वह रियो में भी उसके साथ हैं। वह यशस्विनी के खाने पीने का ख्याल रखती हैं।